फ़रवरी 4, 2026

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तीसरा विश्व युद्ध अब अंतरिक्ष में? अमेरिका, रूस, चीन और भारत के पास है स्पेस वॉर की ताकत

नई दिल्ली।
दुनिया इस समय कई युद्धों से जूझ रही है। रूस-यूक्रेन का युद्ध दो साल से अधिक समय से थम नहीं पाया है, वहीं इज़रायल-हमास और इज़रायल-ईरान संघर्ष भी गहराते जा रहे हैं। इन हालातों के बीच एक्सपर्ट्स का मानना है कि दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर तेजी से बढ़ रही है। फर्क बस इतना होगा कि यह जंग सिर्फ जमीन या आसमान में नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में भी छिड़ सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कई बड़े देशों ने भविष्य को देखते हुए अंतरिक्ष युद्ध की तैयारियां पहले ही शुरू कर दी हैं। उनके पास ऐसे उपग्रह और हथियार हैं जो दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ, दुश्मन के सैटेलाइट को नष्ट करने में भी सक्षम हैं। इस सूची में अमेरिका, रूस, चीन और भारत जैसे बड़े देशों का नाम शामिल है।

अमेरिका

अमेरिका को हमेशा से दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति माना जाता है। उसके पास एंटी-सैटेलाइट मिसाइल (ASAT) तकनीक है, जो अंतरिक्ष में मौजूद किसी भी उपग्रह को सीधा निशाना बनाकर खत्म कर सकती है। 1985 में अमेरिका ने F-15 जेट से मिसाइल दागकर सैटेलाइट गिराने का सफल परीक्षण किया था। आज अमेरिका के पास सैकड़ों जासूसी उपग्रह हैं जो दुनिया के हर हिस्से पर नजर रखते हैं।

रूस

रूस भी अंतरिक्ष युद्ध की ताकत रखने वाले देशों में अग्रणी है। 2007 के बाद से उसने कई गुप्त मिशन पूरे किए हैं और एंटी-सैटेलाइट तकनीक का प्रदर्शन किया है। 2021 में अमेरिका ने आरोप लगाया था कि रूस ने एक मिसाइल से अपने ही उपग्रह को नष्ट कर दिया। इससे साफ है कि रूस इस दिशा में लगातार अपनी क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।

चीन

चीन भी अंतरिक्ष युद्ध की दौड़ में पीछे नहीं है। 2007 में उसने एंटी-सैटेलाइट मिसाइल से एक वेदर सैटेलाइट को सफलतापूर्वक नष्ट कर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई। चीन के पास कई जासूसी उपग्रह हैं, जिनका उपयोग उसने पाकिस्तान की मदद से भारत पर निगरानी रखने के लिए किया था।

भारत

भारत ने भी हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। साल 2019 में मिशन शक्ति के तहत भारत ने लो-ऑर्बिट सैटेलाइट को एंटी-सैटेलाइट मिसाइल से गिराकर अपनी क्षमता साबित की। इस सफलता ने भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है जिनके पास अंतरिक्ष युद्ध की तकनीक है।

निष्कर्ष

स्पष्ट है कि अब युद्ध का दायरा सिर्फ जमीन और हवा तक सीमित नहीं रह गया है। आने वाले समय में यदि वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं, तो तीसरे विश्व युद्ध की तस्वीर में स्पेस वॉर भी शामिल हो सकता है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाला दौर अंतरिक्ष में वर्चस्व की जंग का हो सकता है।

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