मार्च 22, 2026

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धर्म बदलने का नया ग्लोबल ट्रेंड! जानें क्यों ईसाई धर्म छोड़ रहे सबसे ज्यादा लोग, और हिंदू-मुस्लिम कैसे टिके हुए हैं

नई दिल्ली, 11 सितंबर 2025 – दुनिया की आबादी अब 800 करोड़ को पार कर चुकी है और इसी बीच धार्मिक रुझानों को लेकर आई Pew Research Center Report 2025 ने चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए हैं। रिपोर्ट बताती है कि पूरी दुनिया में 55 साल से कम उम्र के हर 10 में से 1 व्यक्ति अपने बचपन का धर्म छोड़ चुका है। यह धार्मिक परिदृश्य में बड़े बदलाव का संकेत है।


ईसाई धर्म को सबसे बड़ा झटका

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रिपोर्ट के अनुसार, धर्म परिवर्तन के मामले में सबसे ज्यादा नुकसान ईसाई धर्म को हुआ है।

  • 100 ईसाइयों में से 17.1% ने धर्म छोड़ा,
  • जबकि केवल 5.5% ने ईसाई धर्म अपनाया

इस तरह नेट लॉस 11.6% रहा। यानी, जितने लोग ईसाई बने, उससे कहीं ज्यादा ने धर्म छोड़ दिया। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह गिरावट खासतौर पर पश्चिमी देशों (अमेरिका, कनाडा, यूरोप) में देखने को मिली है।


बौद्ध धर्म – छोड़ने और अपनाने दोनों में शीर्ष पर

दिलचस्प बात यह है कि बौद्ध धर्म छोड़ने वालों की संख्या सबसे ज्यादा रही।

  • 100 बौद्धों में से 22.1% ने धर्म छोड़ा,
  • वहीं 12.3% ने बौद्ध धर्म अपनाया

इसका मतलब नेट लॉस 9.8% रहा। बौद्ध धर्म की Retention Rate (अनुयायियों को बनाए रखने की क्षमता) सिर्फ 78% है, जो इसे सबसे कमजोर धार्मिक संरचना बनाती है।

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Nones – धर्म छोड़ने वालों की सबसे बड़ी जमात

रिपोर्ट में सबसे बड़ा फायदा धर्म से असंबद्ध (Nones) लोगों को हुआ है।

  • 100 में से 24.2% लोग धार्मिक पहचान छोड़कर असंबद्ध बने,
  • जबकि केवल 7.5% लोग असंबद्धता छोड़कर किसी धर्म में लौटे

इस तरह कुल मिलाकर 16.7% का शुद्ध इजाफा हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई पीढ़ी में आस्था से दूरी, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और वैज्ञानिक सोच को महत्व देने का चलन बढ़ रहा है।


मुस्लिम और हिंदू धर्म में स्थिरता क्यों?

जहां ईसाई और बौद्ध धर्म में गिरावट दर्ज की गई, वहीं इस्लाम और हिंदू धर्म में धर्म परिवर्तन की दर बेहद कम रही।

  • छोड़ने और अपनाने वालों की संख्या लगभग बराबर है।
  • इसका कारण सांस्कृतिक मजबूती, सामुदायिक जुड़ाव और पारिवारिक परंपराएं मानी जा रही हैं।

शिक्षा और संपन्नता का सीधा असर

Pew Research ने धर्म परिवर्तन और UN Human Development Index (HDI) के बीच भी संबंध बताया।

  • HDI 0.8 या उससे अधिक वाले देश (अमेरिका, यूरोप, कनाडा) में 18% वयस्कों ने अपना बचपन का धर्म छोड़ा।
  • वहीं, HDI 0.55 से कम वाले देश (अफ्रीका और दक्षिण एशिया) में सिर्फ 3% लोग ही धर्म छोड़ पाए।

इससे साफ है कि जितनी अधिक शिक्षा, आय और स्वतंत्रता, उतना ज्यादा धर्म परिवर्तन और असंबद्धता की संभावना।


निष्कर्ष

प्यू रिसर्च की यह ताजा रिपोर्ट दुनिया में धर्म और आस्था के बदलते रुझानों की झलक दिखाती है। जहां ईसाई और बौद्ध धर्म को अपने अनुयायियों को बनाए रखने में संघर्ष करना पड़ रहा है, वहीं हिंदू और मुस्लिम धर्म स्थिर दिखाई दे रहे हैं। साथ ही, धर्म से असंबद्ध लोगों की बढ़ती संख्या इस ओर इशारा करती है कि आने वाले दशकों में “Nones” वैश्विक धार्मिक परिदृश्य का सबसे बड़ा चेहरा बन सकते हैं

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