फ़रवरी 4, 2026

News Valley 24

"सच्ची खबरों की वादी" "न्यूज़ वैली 24"

राज्यपाल और राष्ट्रपति पर समयसीमा लागू करना संविधान संशोधन जैसा होगा : केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत में दाखिल अपने नोट में दलील दी कि यदि सुप्रीम कोर्ट समयसीमा तय करता है, तो इससे संविधान द्वारा स्थापित व्यवस्था में हस्तक्षेप होगा और कानून के शासन की अनदेखी होगी।

केंद्र ने कहा कि राष्ट्रपति और राज्यपालों के पद संवैधानिक और राजनीतिक रूप से पूर्ण हैं। किसी भी कथित चूक या विलंब का समाधान संवैधानिक और राजनीतिक तंत्र के माध्यम से होना चाहिए, न कि न्यायिक हस्तक्षेप से।

मेहता ने कहा कि अनुच्छेद 200 और 201, जो राज्यपाल और राष्ट्रपति के विकल्पों से संबंधित हैं, में जानबूझकर कोई समयसीमा नहीं दी गई है। उन्होंने तर्क दिया, “जहां संविधान समय-सीमा तय करना चाहता है, वहां इसका स्पष्ट उल्लेख करता है। लेकिन जहां लचीलापन आवश्यक है, वहां कोई समयसीमा नहीं रखी गई। न्यायालय द्वारा ऐसी सीमा तय करना संविधान में संशोधन करने जैसा होगा।”

केंद्र ने यह भी कहा कि किसी एक संवैधानिक अंग की कथित विफलता किसी अन्य अंग को ऐसी शक्तियां ग्रहण करने का अधिकार नहीं देती, जो संविधान ने उसे प्रदान नहीं की हैं। किसी भी मुद्दे का समाधान चुनावी जवाबदेही, विधायी निरीक्षण और कार्यपालिका की जिम्मेदारी जैसे संवैधानिक तंत्रों से किया जाना चाहिए।

About The Author

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Copyright © All rights reserved | Portal Designed By Pitambara Media House, Rajnandgaon, C.G. Mobile : 7000255517 | Newsphere by AF themes.
error: Content is protected !!