सोनम वांगचुक के स्कूल पर ताला लगने का खतरा: भूमि आवंटन रद्द, राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
लद्दाख में शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में नवाचारों से देश-विदेश में पहचान बनाने वाले सोनम वांगचुक एक बड़े विवाद में घिर गए हैं। लेह की लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (LAHDC) ने उनके संस्थान हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग (HIAL) को दी गई 1076 कनाल जमीन का आवंटन रद्द कर दिया है।

क्यों हुआ आवंटन रद्द?
एलएएचडीसी के उपायुक्त और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रोमिल सिंह द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि:
- जमीन मई 2018 में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए स्वीकृत की गई थी।
- सात साल से अधिक समय तक इस पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।
- संस्थान ने आवंटन अवधि (5 मई, 2019) समाप्त होने के बाद भी आवश्यकताओं का पालन नहीं किया।
- कोई औपचारिक पट्टा विलेख निष्पादित नहीं किया गया और कई उल्लंघन पाए गए।
इन कारणों का हवाला देकर प्रशासन ने जमीन राज्य को वापस लेने का आदेश जारी किया और अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए।
वांगचुक का आरोप – “राजनीतिक प्रतिशोध”
प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता और एचआईएएल के संस्थापक सोनम वांगचुक का कहना है कि यह कार्रवाई राजनीतिक साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग में उनकी सक्रिय भागीदारी के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
एचआईएएल की सह-संस्थापक डॉ. गीतांजलि जे. अंगमो ने भी कहा कि:
“हमने यूजीसी अध्यक्ष और केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मुलाकात की थी। हमें बताया गया कि जब तक सोनम वांगचुक छठी अनुसूची के लिए संघर्ष जारी रखेंगे, तब तक आवंटन स्थगित रहेगा।”
विपक्ष और संगठनों की प्रतिक्रिया
- लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने इस नोटिस की कड़ी निंदा की।
- उनका कहना है कि यह लद्दाख की असहमति की आवाजों को दबाने का प्रयास है।
- सज्जाद कारगिली ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह कदम राजनीतिक प्रतिशोध है और वे वांगचुक व LAB के साथ खड़े हैं।
बड़ा सवाल
लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्र में, जहां पर्यावरण और शिक्षा को लेकर सोनम वांगचुक ने नई दिशा दी, वहां उनका संस्थान बंद होने की कगार पर क्यों पहुंच गया? क्या यह केवल नियमों का उल्लंघन है या फिर एक बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा?






