फ़रवरी 4, 2026

News Valley 24

"सच्ची खबरों की वादी" "न्यूज़ वैली 24"

प्रधानमंत्री पद को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान, साधु समाज के विवादों पर दी सफाई

मुंबई, 26 अगस्त 2025।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने प्रधानमंत्री पद और साधु समाज में चल रही खींचतान को लेकर बड़ा बयान दिया है। मुंबई में मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि भारत में प्रधानमंत्री वही बनता है जिसे जनता चुनती है, न कि कोई “राहुल” या “राजा”। उन्होंने दोहराया कि लोकतंत्र में जनमत सर्वोपरि है और वही तय करता है कि किसे प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी मिलेगी।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा— “जिसे जनता सही समझेगी, वही प्रधानमंत्री बनेगा। यहां राजा बनाकर कोई प्रधानमंत्री नहीं बनता, जनता तय करती है। इस देश में जिसे लोग स्वीकार करेंगे, वही पद पाएगा।”


साधु समाज में “विवाद” पर सफाई

जब उनसे सवाल किया गया कि हिंदू संतों और साधु समाज के बीच आरोप-प्रत्यारोप क्यों बढ़ रहे हैं और स्थिति युद्ध जैसी क्यों दिखाई देती है, तो उन्होंने इसका सीधा जवाब दिया। स्वामी जी ने कहा कि साधुओं में कोई वास्तविक विवाद नहीं है, बल्कि यह “शास्त्रार्थ” और “अभ्यास” का हिस्सा है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा— “आप सेना में जाइए, वहां रोज शस्त्राभ्यास होता है। इसका मतलब यह नहीं कि रोज युद्ध हो रहा है। उसी तरह संत समाज में भी तर्क और शास्त्रार्थ अभ्यास का हिस्सा हैं। यह आपसी बहस-विवाद युद्ध नहीं बल्कि अभ्यास है, ताकि जब विरोधी सामने आए तो उसके सवालों का सही जवाब दिया जा सके।”

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे “तरकश के तीरों को परखना” बताया। उन्होंने कहा— “जब विरोध सामने आए तो जवाब देने के लिए हमें तैयार रहना होता है। इसलिए संत आपस में तर्क करके अपनी विद्वता और क्षमता को परखते रहते हैं। इसे विवाद नहीं समझना चाहिए।”


हालिया विवाद: प्रेमानंद महाराज और स्वामी रामभद्राचार्य

गौरतलब है कि हाल ही में संत प्रेमानंद महाराज और स्वामी रामभद्राचार्य के बीच सार्वजनिक विवाद ने संत समाज को चर्चा में ला दिया था। स्वामी रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद महाराज की विद्वता पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अगर वे संस्कृत के ज्ञानी हैं तो उनके सामने एक अक्षर बोलकर दिखाएं। इस पर कई कथावाचकों और संतों ने प्रेमानंद का समर्थन किया।

इसके पहले, अनिरुद्धाचार्य महाराज और प्रेमानंद महाराज के महिलाओं पर दिए गए विवादित बयानों ने भी संत समाज को दो हिस्सों में बांट दिया था। इस पूरे विवाद पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने टिप्पणी करते हुए कहा— “क्या केवल संस्कृत बोलना ही विद्वता का प्रमाण है? विद्वता का मूल्यांकन ज्ञान और आचरण से होता है।”


समापन

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का यह बयान ऐसे समय आया है जब संत समाज लगातार सुर्खियों में है। प्रधानमंत्री पद पर उनकी टिप्पणी और साधु विवादों को लेकर दी गई सफाई ने राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

About The Author

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Copyright © All rights reserved | Portal Designed By Pitambara Media House, Rajnandgaon, C.G. Mobile : 7000255517 | Newsphere by AF themes.
error: Content is protected !!