नई SOP: असम में अब अंतर-धार्मिक जमीन सौदों पर सख्त जांच होगी
गुवाहाटी, 28 अगस्त 2025 – असम सरकार ने अंतर-धार्मिक जमीन सौदों के लिए एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू कर दी है। इस SOP का मुख्य उद्देश्य जमीन के लेन-देन में पारदर्शिता लाना, धोखाधड़ी और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना तथा सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाद इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब से यदि कोई व्यक्ति अपनी जमीन किसी अलग धर्म के व्यक्ति को बेचना या खरीदना चाहता है, तो यह प्रक्रिया केवल साधारण रजिस्ट्री तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें विस्तृत जांच-पड़ताल की जाएगी।

SOP में क्या-क्या होगा शामिल?
नई SOP के अनुसार, जमीन के अंतर-धार्मिक हस्तांतरण में निम्नलिखित पहलुओं की जांच होगी:
- धोखाधड़ी की आशंका – क्या सौदे में कोई फर्जीवाड़ा या अवैध गतिविधि तो नहीं हो रही?
- फंडिंग का स्रोत – खरीदार जमीन खरीदने के लिए पैसा कहां से ला रहा है, क्या यह वैध है?
- सामाजिक प्रभाव – इस जमीन सौदे का इलाके के सामाजिक ताने-बाने और शांति पर क्या असर पड़ेगा?
- राष्ट्रीय सुरक्षा – क्या इस लेन-देन से सुरक्षा एजेंसियों को कोई खतरा महसूस हो सकता है?
किन पर लागू होगी यह SOP?
- यह प्रक्रिया केवल तब लागू होगी जब खरीदार और विक्रेता अलग-अलग धर्म के हों।
- अगर दोनों एक ही धर्म के हैं, तो जमीन सौदे में इस SOP का पालन आवश्यक नहीं होगा।
सरकार का तर्क
सरकार का कहना है कि असम जैसे संवेदनशील राज्य में जमीन के लेन-देन को लेकर कई बार विवाद सामने आते हैं। इस SOP का मकसद है कि जमीन सौदों में पारदर्शिता बनी रहे और भविष्य में किसी प्रकार के सामाजिक तनाव या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खतरे न पैदा हों।

विपक्ष का रुख
विपक्षी दलों ने इस SOP को लेकर आशंका जताई है कि इससे एक विशेष समुदाय को टारगेट किया जा सकता है। हालांकि, सरकार का दावा है कि यह नियम किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं बल्कि संपूर्ण सामाजिक संतुलन और सुरक्षा के लिए बनाया गया है।
नतीजा
नई SOP लागू होने के बाद अब असम में जमीन का अंतर-धार्मिक सौदा पहले से ज्यादा जटिल और निगरानी में रहेगा। इससे यह देखना होगा कि क्या इस कदम से वास्तव में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ेगी या फिर यह नया विवाद खड़ा करेगा।






