अहमदाबाद में ‘डिजिटल अरेस्ट’ गैंग ने 8.5 करोड़ की ठगी: नकली कोर्टरूम, फर्जी CJI लेटर और ऐप लिंक से खातों पर हाथ
अहमदाबाद।
शहर की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने खुद को केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताकर एक वरिष्ठ नागरिक से लगभग 8.5 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने पीड़ित को “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी दी, फर्जी ऑनलाइन कोर्टरूम रचा, सुप्रीम कोर्ट के नाम से चीफ जस्टिस के कथित पत्र की प्रति भेजी और अंततः उसके शेयर बेचवाकर रकम को RTGS के जरिए सात अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा ली। पुलिस ने मुख्य तीन आरोपियों—पप्पू सिंह, आसिफ शाह और विकास कुमार—को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मास्टर हैंडलर ‘मोंटी’ की तलाश जारी है।

कैसे शुरू हुआ ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ का जाल
मामले की शुरुआत 28 जुलाई को पीड़ित के पास आए एक व्हाट्सऐप कॉल से हुई। कॉलर ने खुद को ईडी/मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर कहा कि “नरेश गोयल–जेट एयरवेज स्कैम” की जांच में केनरा बैंक, मुंबई के एक खाते में 5 लाख रुपये आए हैं और पीड़ित का नाम मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। इसके बाद पीड़ित को धमकाया गया कि उसे 40 दिन की अदालत रिमांड पर डिजिटल रूप से गिरफ्तार किया जा सकता है, और किसी से बात करना “देशविरोधी गतिविधि” माना जाएगा। विश्वास जमाने के लिए आरोपियों ने ऑनलाइन ‘फर्जी कोर्ट’ रचा और कार्यवाही का भ्रम देने के लिए वित्त मंत्रालय/राजस्व विभाग/सुप्रीम कोर्ट हेडिंग वाला एक तथाकथित पत्र भेजा, जिसमें CJI भुषण रामकृष्ण गवई का नाम दर्ज था।
शेयर बिकवाए, रकम सात खातों में उड़ाई
डर और गोपनीयता के दबाव में पीड़ित से डीमैट/बैंकिंग विवरण निकलवाए गए। इसके बाद उसके शेयर बेचे गए और 27 जुलाई से 12 अगस्त के बीच 8.5 करोड़ रुपये अलग-अलग 7 बैंक खातों में RTGS से भेजे गए। एक लेनदेन 80 लाख रुपये का था, जो ‘बालाजी खीरू एंड फास्ट फूड’ नाम के खाते में गया। जांच में यह खाता पप्पू सिंह (नारोल, मूल निवासी राजस्थान) का निकला, जिसे दबोच लिया गया।
गिरोह की परतें: ‘खाते किराए पर’, हाई-लिमिट की तलाश और विदेशी कड़ी
पूछताछ में सामने आया कि आसिफ शाह (अमरेली) कमीशन पर बैंक खाते किराए पर उपलब्ध कराता था। विकास कुमार (UP) ने आसिफ से करोड़ों की लिमिट वाले खातों की मांग की। 24 जुलाई को विकास ने पप्पू सिंह के खाते के दस्तावेज आसिफ को भेजे, यह कहते हुए कि खाते में 5 करोड़ तक की लिमिट है। विकास ने आगे यह डिटेल टेलीग्राम पर हैंडल @alexmontiraj यानी कथित ‘मोंटी’ को भेजी, जो कसीनो/गेमिंग के धन का लेन-देन कराता था और खातों के ऑपरेशन पर 2% कमीशन देता था। जांच के मुताबिक ‘मोंटी’ ने पप्पू के मोबाइल पर एक फर्जी पेमेंट-ऐप लिंक भिजवाया; लिंक सक्रिय होते ही एसएमएस/ओटीपी की पहुंच अपराधियों को मिल गई और खाते से 80 लाख रुपये खींच लिए गए। शुरुआती लीड बताती हैं कि ‘मोंटी’ के पीछे कंबोडिया आधारित सिंडिकेट हो सकता है।
गिरफ्तारी और जब्ती
क्राइम ब्रांच ने ताबड़तोड़ कार्रवाई में पप्पू सिंह, आसिफ शाह और विकास कुमार को गिरफ्तार किया। दबिश के दौरान पुलिस ने 32 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, 1 पेटीएम स्वाइप मशीन, 6 बैंक चेकबुक, 2 पासबुक, 21 डेबिट/क्रेडिट कार्ड, 6 स्टांप और 5 पेन-ड्राइव जब्त कीं। जांच में यह भी सामने आया कि कॉलिंग/OTP के लिए इस्तेमाल मोबाइलों में एक समय में 272 सिम सक्रिय थीं—यह गिरोह के इंडस्ट्रियल-स्केल ऑपरेशन की ओर इशारा करता है।
‘डिजिटल अरेस्ट’ क्या है?

यह नया स्कैम मॉडल है, जिसमें ठग कानूनी एजेंसियों का भेस धरकर पीड़ित को बताते हैं कि उस पर गंभीर अपराध में शामिल होने का शक है; फिर ‘ऑनलाइन कोर्ट’, ‘वर्चुअल रिमांड’ और ‘सीक्रेसी ऑर्डर’ जैसा मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर उसकी वित्तीय/डिजिटल पहुंच हथिया लेते हैं।
पुलिस की अपील
क्राइम ब्रांच ने नागरिकों से अपील की है कि—
- किसी भी व्हाट्सऐप/टेलीग्राम कॉल पर खुद को ईडी/क्राइम ब्रांच/कोर्ट बताने वाले लोगों से सावधान रहें।
- सरकारी एजेंसियां सोशल ऐप कॉल पर पैसे या ओटीपी/स्क्रीन-शेयर नहीं मांगतीं, न ही ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ जैसी प्रक्रिया करती हैं।
- संदिग्ध कॉल/लिंक/ऐप की सूचना साइबर क्राइम पोर्टल या नजदीकी थाने में दें।
- शेयर/बैंक/UPI की जानकारी किसी के कहने पर साझा न करें; किसी भी ‘ऑनलाइन कोर्ट’ या ‘सीक्रेसी ऑर्डर’ का स्वतंत्र सत्यापन अवश्य करें।

पुलिस के मुताबिक ‘मोंटी’ की तलाश जारी है और अंतरराज्यीय/अंतरराष्ट्रीय लिंक की पड़ताल के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। उधर, पीड़ित के खातों में गई रकम की ट्रेल खंगाली जा रही है और बैंक/इंटरमीडियरीज़ से समन्वय कर रिकवरी की कोशिशें तेज हैं।






