फ़रवरी 4, 2026

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सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: “वाहन मालिकों को इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल लेने पर किया जा रहा मजबूर”, सोमवार को होगी अहम सुनवाई

देशभर में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति अब न्यायालय की चौखट तक पहुंच चुकी है। सुप्रीम कोर्ट सोमवार, 1 सितंबर को उस जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP-20) को अनिवार्य रूप से लागू किए जाने पर सवाल उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि लाखों वाहन मालिकों को ऐसा ईंधन भरने पर मजबूर किया जा रहा है, जो उनके वाहनों के तकनीकी अनुरूप नहीं है।

याचिका में क्या कहा गया?

वकील अक्षय मल्होत्रा द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को निर्देश दिए जाएं कि सभी पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल-मुक्त पेट्रोल भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि उपभोक्ताओं के पास विकल्प हो।

याचिका में यह भी मांग की गई है कि–

  • पेट्रोल पंपों पर अनिवार्य रूप से इथेनॉल की मात्रा का लेबल लगाया जाए।
  • उपभोक्ताओं को यह स्पष्ट जानकारी दी जाए कि उनका वाहन इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के लिए उपयुक्त है या नहीं।
  • केवल उन्हीं वाहनों में EBP-20 भरवाने की अनुमति हो, जो इसके लिए डिज़ाइन किए गए हों।

अदालत में कब होगी सुनवाई?

यह मामला प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष 1 सितंबर को सूचीबद्ध किया गया है। माना जा रहा है कि इस सुनवाई के बाद देशभर में इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी को लेकर बड़ा फैसला आ सकता है।

पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की पॉलिसी

भारत सरकार लंबे समय से ग्रीन एनर्जी और इंपोर्ट डिपेंडेंसी कम करने के लिए इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा दे रही है। वर्तमान में देशभर में 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उपलब्ध कराने की योजना चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है।


पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के फायदे और नुकसान

फायदे (Pros):

  1. विदेशी मुद्रा की बचत: कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटती है।
  2. पर्यावरण को लाभ: इथेनॉल एक बायो-फ्यूल है, जिससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम होता है।
  3. किसानों को फायदा: गन्ना और मक्का जैसी फसलों से इथेनॉल बनने के कारण किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलता है।
  4. नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल: इथेनॉल प्राकृतिक स्रोतों से बनता है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा बढ़ती है।

नुकसान (Cons):

  1. वाहनों पर असर: सभी पुराने वाहन इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लिए उपयुक्त नहीं होते, इससे इंजन और फ्यूल सिस्टम को नुकसान हो सकता है।
  2. माइलेज में कमी: EBP-20 से वाहनों का माइलेज सामान्य पेट्रोल की तुलना में घट सकता है।
  3. फूड सिक्योरिटी पर असर: गन्ना, मक्का जैसी खाद्य फसलों के बड़े पैमाने पर इथेनॉल उत्पादन में उपयोग होने से खाद्य संकट का खतरा।
  4. भंडारण और वितरण में चुनौतियां: इथेनॉल पानी को सोखता है और जल्दी खराब हो सकता है, जिससे स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट पर अतिरिक्त लागत आती है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से साफ होगा कि उपभोक्ताओं को विकल्प देने की दिशा में सरकार को नया कदम उठाना पड़ेगा या फिर मौजूदा नीति को ही लागू रखा जाएगा। इस मामले पर देशभर के वाहन मालिकों और उद्योग जगत की निगाहें टिकी हुई हैं।

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