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दोहरी वोटर लिस्ट विवाद पर घिरे पवन खेड़ा, बोले– आयोग का नोटिस स्वीकार पर जिम्मेदारी उसकी है!

नई दिल्ली, 02 सितम्बर 2025।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा पर दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों—नई दिल्ली और जंगपुरा—की मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का आरोप लगा है। इस मामले में चुनाव आयोग ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है और 8 सितंबर को आयोग के समक्ष पेश होने के लिए कहा है।

खेड़ा ने NDTV से बातचीत में कहा कि वह नोटिस का जवाब जरूर देंगे, लेकिन सवाल यह है कि चुनाव आयोग यही तत्परता दूसरे मामलों में भी क्यों नहीं दिखाता। उन्होंने कहा, “2016 में मैं उस क्षेत्र से शिफ्ट हो गया था और फॉर्म 7 भरकर अपना नाम हटाने का आवेदन भी दिया था। इसके बावजूद अब तक चार चुनाव—2019 लोकसभा, 2020 विधानसभा, 2024 लोकसभा और 2025 विधानसभा—हो चुके हैं, लेकिन मेरा नाम अब भी सूची में है। यह साफ करता है कि बीएलओ किस तरह काम करते हैं।”

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि वोटर लिस्ट की शुद्धता बनाए रखना और चुनाव कराना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि उनके पास केवल एक सक्रिय वोटर आईडी है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश गुप्ता जी को अपने सहयोगियों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए। अनुराग ठाकुर के बाद अब अमित मालवीय ने भी मुझे निशाना बनाना आसान समझा।”

इसी मामले में भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया था कि पवन खेड़ा के पास नई दिल्ली और जंगपुरा दोनों क्षेत्रों में सक्रिय मतदाता पहचान पत्र (EPIC नंबर) हैं और सवाल उठाया कि क्या उन्होंने कई बार मतदान किया है।

जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है, “आपका नाम एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में दर्ज है, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः आप बताएं कि आपके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।”

पवन खेड़ा ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि मतदाता सूची में गड़बड़ी के लिए वह नहीं बल्कि चुनाव आयोग जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, “हम मशीन रीडेबल वोटर लिस्ट और महाराष्ट्र में मतदान बूथों की सीसीटीवी फुटेज की मांग कर रहे हैं, लेकिन हमें इनमें से कुछ भी उपलब्ध नहीं कराया गया। इसी वजह से हम इसे वोट चोरी कहते हैं।”

कांग्रेस प्रवक्ता ने आगे कहा कि बिहार में चल रही ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान कई ऐसे लोग सामने आए हैं जिन्हें जीवित होने के बावजूद मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को राजनीति से प्रेरित करार देते हुए कहा कि आयोग को पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए।

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