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पीएम की मां को गाली मामला: NDA ने बुलाया बिहार बंद, चुनावी रणनीति में बीजेपी ने साधा बड़ा मुद्दा

नई दिल्ली/पटना, 03 सितंबर 2025।
बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एनडीए (NDA) ने विपक्ष की कथित बड़ी चूक को अपने सबसे बड़े हथियार में बदल दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत मां को लेकर दरभंगा में हुए विवादित बयान के बाद भाजपा ने इसे भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर एक बड़ा चुनावी मुद्दा बना दिया है। अब 4 सितंबर को बिहार बंद का आह्वान किया गया है, जबकि अखबारों और विज्ञापनों के जरिए जनता से भावुक अपील भी की जा रही है।

कांग्रेस की ‘गलती’ और बीजेपी का पलटवार

राजनीति के जानकार मानते हैं कि कांग्रेस और राजद (RJD) के मंच से पीएम मोदी और उनकी मां के खिलाफ अभद्र शब्दों का इस्तेमाल महागठबंधन की बड़ी भूल साबित हो सकती है। राहुल गांधी अपनी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के जरिए बिहार में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन यह विवाद उनके किए-कराए पर पानी फेरता दिख रहा है। बीजेपी ने इस मौके को भुनाने में देर नहीं लगाई और इसे जनता की भावनाओं से जोड़कर प्रचारित करना शुरू कर दिया।

बिहार में NDA की भावुक अपील

एनडीए ने 4 सितंबर को पांच घंटे का बिहार बंद बुलाया है। इसके लिए बुधवार को प्रदेश के अखबारों में विज्ञापन दिए गए, जिनमें एक मां की तस्वीर और अपमान से आहत व्यक्ति का चित्र लगाकर लोगों से अपील की गई है कि वे बंद में स्वेच्छा से शामिल हों। भाजपा नेताओं ने कहा है कि आपातकालीन सेवाएं इससे प्रभावित नहीं होंगी और जनता को कम से कम असुविधा देने का प्रयास किया जाएगा।

बीजेपी की कोर कमिटी बैठक और रणनीति

भाजपा की कोर कमिटी की बैठक आज (3 सितंबर) बुलाई गई है। इसमें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और नित्यानंद राय समेत कई दिग्गज नेता शामिल होंगे। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में बिहार चुनाव की रणनीति तय होगी और पीएम की मां को गाली वाले मुद्दे को किस तरह से चुनाव में भुनाया जाए, इस पर मंथन होगा।

पीएम मोदी की भावुक अपील

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मंगलवार को संबोधित करते हुए पीएम मोदी इस मामले पर पहली बार बोले। भावुक होते हुए उन्होंने कहा, “मेरी मां का राजनीति से कोई संबंध नहीं था। फिर उनको बुरा क्यों कहा गया? एक बार के लिए मैं माफ कर सकता हूं, लेकिन देश और बिहार की जनता कभी किसी मां का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी।”

बीजेपी को पहले भी मिले ऐसे मौके

भारतीय राजनीति में यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष की टिप्पणी बीजेपी के लिए मुद्दा बनी हो।

  • 2007: सोनिया गांधी ने मोदी को ‘मौत का सौदागर’ कहा था, जिसका नतीजा गुजरात में कांग्रेस की हार रही।
  • 2014: मणिशंकर अय्यर ने मोदी को ‘चायवाला’ कह दिया, जिसे बीजेपी ने चुनावी मुद्दा बनाया और लोकसभा चुनाव जीत लिया।
  • 2017: अय्यर के ही ‘नीच’ वाले बयान ने बीजेपी को फायदा पहुंचाया।
  • 2019: राहुल गांधी का ‘चौकीदार चोर है’ नारा उल्टा पड़ा और बीजेपी ने ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान से इसे पलट दिया।

राहुल गांधी की मुश्किलें

बिहार में राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ को युवाओं और आम जनता का अच्छा समर्थन मिल रहा था। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह यात्रा चुनावी माहौल में कांग्रेस-राजद के पक्ष में हवा बना सकती थी। लेकिन दरभंगा की घटना ने इस पूरी मेहनत को कमजोर कर दिया है और बीजेपी ने इसे एक बड़ा चुनावी हथियार बना लिया है।

निष्कर्ष

बिहार चुनाव अब भावनाओं की राजनीति की ओर मुड़ता नजर आ रहा है। एनडीए जहां पीएम मोदी की मां को गाली वाले मुद्दे पर जनता की सहानुभूति बटोरने में जुट गया है, वहीं कांग्रेस और राजद बचाव की मुद्रा में हैं। 4 सितंबर को बिहार बंद का असर और जनता की प्रतिक्रिया यह तय कर सकती है कि यह मुद्दा कितना गहराई से वोटरों के मन को प्रभावित करता है।

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