बिहार चुनाव से पहले महागठबंधन को मजबूती: पशुपति पारस की पार्टी और झारखंड मुक्ति मोर्चा INDIA गठबंधन में शामिल
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पटना, 06 सितम्बर 2025।
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी महागठबंधन (INDIA Block) का कुनबा और मजबूत हो गया है। शनिवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के पटना स्थित आवास पर आयोजित बैठक में एक बड़ा राजनीतिक फैसला लिया गया। अब पशुपति पारस गुट की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) भी महागठबंधन में शामिल होकर बिहार में राजद और कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ेगी।
यह फैसला विपक्षी एकता को मजबूती देने के साथ-साथ बिहार की चुनावी राजनीति में नया समीकरण गढ़ने वाला माना जा रहा है।
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चिराग पासवान के वोट बैंक पर पड़ेगा असर
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पशुपति पारस गुट के महागठबंधन में शामिल होने से चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) के वोट बैंक पर सीधा असर पड़ सकता है। पशुपति पारस गुट के साथ सूरजभान सिंह जैसे कई बड़े नेता भी जुड़े हुए हैं, जिससे गठबंधन की ताकत बढ़ेगी।
दूसरी ओर, जेएमएम की एंट्री भी महागठबंधन के लिए फायदेमंद मानी जा रही है। भागलपुर, बांका और मुंगेर जैसे इलाकों में झारखंड से सटे होने के कारण झामुमो का अच्छा जनाधार है। ऐसे में इन इलाकों में विपक्ष की पकड़ और मजबूत हो सकती है।
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सीट बंटवारे पर टिकी सबकी नजर
महागठबंधन में नए दलों के शामिल होने से सबसे बड़ी चुनौती सीटों के बंटवारे की है। तेजस्वी यादव के आवास पर हुई बैठक के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने मीडिया को बताया कि अधिकांश सीटों पर सहमति बन चुकी है और बहुत जल्द अंतिम फार्मूला तय कर लिया जाएगा।
उन्होंने कहा, “गठबंधन के नए दल शामिल हो रहे हैं। इन दोनों दलों को भी सीटें दी जाएंगी। ऐसे में हर पार्टी को कुछ न कुछ त्याग करना होगा। लेकिन हम लोग बहुत जल्द सेट फार्मूला को अंतिम रूप दे देंगे।”
संभावित सीट शेयरिंग का अनुमान
2015 और 2020 के चुनाव नतीजों को देखते हुए और मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए, राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि महागठबंधन में सीटों का बंटवारा कुछ इस तरह हो सकता है:
- राष्ट्रीय जनता दल (राजद): लगभग 100–110 सीटें (क्योंकि गठबंधन में सबसे बड़ा दल है और पिछली बार का प्रदर्शन भी मजबूत रहा)।
- कांग्रेस: 35–40 सीटें (पारंपरिक हिस्सा बरकरार रखते हुए)।
- पशुपति पारस गुट (लोजपा): 15–20 सीटें (विशेषकर पासवान वोट बैंक वाले इलाकों में)।
- झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम): 5–7 सीटें (बांका, भागलपुर, मुंगेर जैसे सीमावर्ती क्षेत्र)।
- अन्य सहयोगी दल: 10–12 सीटें (लेफ्ट पार्टियों और छोटे क्षेत्रीय दलों के लिए)।
हालांकि अंतिम फार्मूला बैठकों और राजनीतिक सहमति पर ही निर्भर करेगा।
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सकारात्मक माहौल में हुई बैठक
बैठक में राजद, कांग्रेस और गठबंधन के अन्य दलों के नेता मौजूद थे। चर्चा बेहद सकारात्मक माहौल में हुई और सभी दलों ने विपक्षी एकता को प्राथमिकता दी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि महागठबंधन का मकसद सिर्फ सीटें जीतना नहीं है, बल्कि बिहार को एक बेहतर विकल्प देना है।
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केरल कांग्रेस विवाद पर सफाई
बैठक के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने हाल ही में केरल कांग्रेस द्वारा किए गए विवादित ट्वीट पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि, “उस ट्वीट को तत्काल हटा लिया गया है। उसका वास्तविक अर्थ अलग था, लेकिन बिहार में उसका अर्थ अलग निकाल लिया गया। अब वह मामला खत्म हो गया है।”
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राजनीति का नया समीकरण
पशुपति पारस गुट और झामुमो के शामिल होने से विपक्षी INDIA गठबंधन अब और बड़ा और मजबूत दिख रहा है। यह बदलाव न सिर्फ महागठबंधन को मजबूती देगा, बल्कि बिहार चुनाव में सत्तारूढ़ दलों के लिए भी चुनौती बढ़ाएगा। अब सबकी निगाहें सीट बंटवारे के अंतिम फार्मूले पर टिकी हुई हैं।






