बिहार एसआईआर विवाद: सुप्रीम कोर्ट में कल होगी अहम सुनवाई, राजनीतिक दलों और आयोग की दलीलों पर विचार
नई दिल्ली। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट सोमवार (08 सितंबर 2025) को इस मामले में दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। इनमें राष्ट्रीय जनता दल (राजद), ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) समेत कई राजनीतिक दलों और संगठनों की ओर से दाखिल याचिकाएं शामिल हैं। अदालत निर्वाचन आयोग की टिप्पणियों और इन पर याचिकाकर्ताओं के जवाबों पर विचार करेगी।
निर्वाचन आयोग का निर्देश और विवाद की जड़
निर्वाचन आयोग ने 24 जून 2025 को बिहार में मतदाता सूची का गहन विशेष पुनरीक्षण (SIR) कराने का आदेश दिया था। आयोग का दावा है कि मसौदा मतदाता सूची में शामिल 7.24 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 99.5 प्रतिशत ने अपनी पात्रता के दस्तावेज जमा करा दिए हैं।
हालांकि, राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस प्रक्रिया में कई विसंगतियां हैं, जिसके कारण लाखों मतदाता छूट सकते हैं। इसीलिए उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व टिप्पणियां
22 अगस्त से चल रही सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि छूटे हुए मतदाताओं को ऑनलाइन माध्यम से भी दावे और आपत्तियां दर्ज करने का विकल्प मिलना चाहिए। अदालत ने इस प्रक्रिया को ‘बड़े पैमाने पर विश्वास का मुद्दा’ बताया और राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह कानूनी स्वयंसेवकों को तैनात करे, ताकि मतदाता मसौदा सूची पर अपने अधिकार सुरक्षित रख सकें।
समय सीमा और आपत्तियों पर टकराव
निर्वाचन आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि 1 सितंबर 2025 तय की थी। सुप्रीम कोर्ट में जब राजनीतिक दलों ने समयसीमा बढ़ाने की मांग की तो आयोग ने इसका विरोध किया।
आयोग का तर्क है कि पहले ही पर्याप्त समय दिया गया और 30 अगस्त तक केवल 22,723 दावे शामिल करने तथा 1,34,738 आपत्तियां बाहर करने के लिए दायर की गईं। इसलिए समयसीमा बढ़ाना उचित नहीं है। आयोग के अनुसार, अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर 2025 को प्रकाशित कर दी जाएगी।
गोपनीय रिपोर्ट और अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कानूनी सहायक संबंधित जिला न्यायाधीशों को गोपनीय रिपोर्ट सौंपेंगे, जिसमें मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों का आकलन होगा। इन रिपोर्टों को समग्र रूप से 8 सितंबर को न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा।
राजनीतिक दलों और आयोग की दलीलें सुनने के बाद अदालत तय करेगी कि एसआईआर प्रक्रिया में आगे क्या बदलाव या सुधार आवश्यक हैं।






