फ़रवरी 4, 2026

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सत्ता के शिखर पर नया नाम: आखिर कौन हैं सी.पी. राधाकृष्णन जो बने देश के उपराष्ट्रपति?

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सी.पी. राधाकृष्णन भारत के नए उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं। जानिए उनके राजनीतिक सफर, पृष्ठभूमि और उपराष्ट्रपति बनने तक की पूरी कहानी।


नई दिल्ली की राजनीति में बड़ा बदलाव

भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है। लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक कौशल के लिए जाने जाने वाले सी.पी. राधाकृष्णन देश के नए उपराष्ट्रपति निर्वाचित हो गए हैं। उनके चयन को भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है, वहीं विपक्ष के लिए यह एक कड़ा संदेश भी है।

कौन हैं सी.पी. राधाकृष्णन?

सी.पी. राधाकृष्णन का नाम भारतीय राजनीति में बेहद सम्मान से लिया जाता है। वे तमिलनाडु से आते हैं और बीजेपी के वरिष्ठ नेता माने जाते हैं। उन्होंने न सिर्फ राज्य स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी संगठन को मजबूत करने में अहम योगदान दिया है।

राजनीतिक सफर

  • राधाकृष्णन ने अपने करियर की शुरुआत आरएसएस और बीजेपी संगठन से की।
  • वे दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और संसद में अपनी बेबाक राय के लिए पहचाने जाते हैं।
  • संगठनात्मक स्तर पर भी उन्होंने पार्टी की पकड़ को दक्षिण भारत में मजबूत किया।
  • हाल ही में वे झारखंड और तमिलनाडु जैसे राज्यों में राज्यपाल भी रहे, जहां उनकी प्रशासनिक कुशलता की खूब सराहना हुई।

उपराष्ट्रपति के रूप में चुनौतियाँ

भारत के उपराष्ट्रपति का सबसे बड़ा दायित्व राज्यसभा की कार्यवाही को कुशलता से संचालित करना होता है। सी.पी. राधाकृष्णन का शांत और सुलझा हुआ व्यक्तित्व इस पद के लिए उन्हें उपयुक्त बनाता है।

  • संसद के ऊपरी सदन में सरकार और विपक्ष के बीच संवाद को बनाए रखना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।
  • साथ ही, संवैधानिक मूल्यों को कायम रखते हुए लोकतंत्र को और मजबूत करना भी उनके सामने बड़ी चुनौती होगी।

राजनीतिक महत्व

राधाकृष्णन के उपराष्ट्रपति बनने से बीजेपी को दक्षिण भारत में एक नई रणनीतिक बढ़त मिल सकती है। यह नियुक्ति केवल संवैधानिक औपचारिकता नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर बनाई गई गहरी राजनीतिक चाल भी मानी जा रही है।


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निष्कर्ष

सी.पी. राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति पद तक पहुँचना केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति में हो रहे बड़े बदलाव का प्रतीक है। उनका अनुभव, संगठनात्मक क्षमता और शांत नेतृत्व शैली निश्चित रूप से संसद और देश के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।

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