फ़रवरी 4, 2026

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“क्या आरक्षण का फायदा लेने वाले उम्मीदवार जनरल सीट पर दावा कर सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला बदला पूरा गणित”


Story:
नई दिल्ली। नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट का एक बड़ा फैसला आया है। यह फैसला खासतौर पर उन उम्मीदवारों से जुड़ा है जो आरक्षण का लाभ लेकर उम्र में छूट पाते हैं और फिर भी सामान्य (General) सीट पर चयन की उम्मीद करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को साफ कर दिया कि अगर कोई उम्मीदवार उम्र में छूट लेता है, तो वह जनरल कैटेगरी की सीट पर दावा नहीं कर सकता — बशर्ते कि भर्ती के नियमों में इसकी मनाही लिखी हो।

इस फैसले से न सिर्फ अर्धसैनिक बलों की भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होगी, बल्कि आने वाले समय में हर उस भर्ती पर असर पड़ेगा जहां उम्र सीमा और आरक्षण का सवाल उठता है।


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मामला क्या था?

यह विवाद कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की कांस्टेबल (GD) भर्ती से जुड़ा था। इस भर्ती के जरिए BSF, CRPF, ITBP, SSB, NIA, SSF और असम राइफल्स में भर्तियां होनी थीं।

  • सामान्य वर्ग के लिए उम्र सीमा 18 से 23 वर्ष तय की गई थी।
  • ओबीसी उम्मीदवारों को 3 साल की छूट दी गई, यानी वे 26 साल तक आवेदन कर सकते थे।

कई ओबीसी उम्मीदवारों ने उम्र में छूट का फायदा लेकर परीक्षा दी। लेकिन जब वे अपने आरक्षित वर्ग की कटऑफ से चयनित नहीं हुए और उनके अंक सामान्य वर्ग के अंतिम चयनित उम्मीदवारों से ज्यादा निकले, तो उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने 2010 के एक पुराने मामले (जितेंद्र कुमार सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) का हवाला देकर कहा कि ऐसे उम्मीदवारों को जनरल सीट पर गिना जाए


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केंद्र सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट

केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सरकार ने 1 जुलाई 1998 के ऑफिस मेमोरेंडम का हवाला दिया, जिसमें साफ तौर पर लिखा था कि जो उम्मीदवार उम्र या अन्य किसी प्रकार की छूट लेते हैं, वे सामान्य श्रेणी की सीटों पर दावा नहीं कर सकते।


सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने त्रिपुरा हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा:

  • अगर उम्मीदवार ने उम्र में छूट ली है, तो उसे सामान्य श्रेणी की सीटों पर शामिल नहीं किया जाएगा।
  • यह नियम तब लागू होगा जब भर्ती विज्ञापन या नियमों में इसकी मनाही स्पष्ट रूप से लिखी हो।

इस तरह, कोर्ट ने साफ कर दिया कि आरक्षण और छूट का लाभ लेकर परीक्षा देने के बाद सामान्य श्रेणी का दावा करना नियमों के खिलाफ है।


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युवाओं पर असर

इस फैसले के बाद हजारों उम्मीदवारों को अपने रणनीति और तैयारी के तरीके पर दोबारा सोचना होगा। अब अगर कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार उम्र की छूट का फायदा लेता है, तो उसे यह पता होना चाहिए कि वह सामान्य सीट पर चयन की उम्मीद नहीं कर सकता।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आने वाले वर्षों में हर भर्ती की गाइडलाइन में और ज्यादा स्पष्ट भाषा जोड़ देगा, जिससे उम्मीदवारों को पहले से ही पता चल सके कि उन्हें किस श्रेणी में गिना जाएगा।


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निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और नियमों का पालन ही सर्वोच्च प्राथमिकता है। अब उम्मीदवारों को यह तय करना होगा कि वे किस आधार पर परीक्षा देंगे— आरक्षण का लाभ लेकर या बिना किसी छूट के।

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