पूरे देश में पहली बार एक साथ होगा SIR, मतदाता सूची सुधार की बड़ी कवायद शुरू
नई दिल्ली, 10 सितम्बर 2025: देशभर के मतदाताओं के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। चुनाव आयोग ने तय किया है कि अब SIR (Special Intensive Revision) यानी मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण पूरे भारत में एक साथ किया जाएगा। यह पहली बार होगा जब बिहार मॉडल को पूरे देश में लागू किया जाएगा। हाल ही में हुई CEO कॉन्फ्रेंस में इस विषय पर गहन चर्चा हुई और आयोग जल्द ही अधिसूचना जारी कर सकता है।
राज्यों की तैयारियां और चुनौतियाँ
बैठक में विभिन्न राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) ने अपनी तैयारियों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि SIR को लेकर वे किस स्तर तक तैयार हैं और किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। आयोग ने संकेत दिया कि पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विशेष बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि वहां दस्तावेजों की अंतिम सूची तैयार की जा सके।
आयोग ने स्पष्ट किया कि जरूरी नहीं है कि बिहार की तरह सभी राज्यों में मतदाता पहचान के लिए 11 दस्तावेज अनिवार्य हों। हर राज्य की परिस्थितियों के हिसाब से दस्तावेजों की सूची अलग हो सकती है।
SIR क्यों है अहम?
SIR यानी Special Intensive Revision का मतलब है मतदाता सूची का गहन और विशेष पुनरीक्षण। इस प्रक्रिया में:
- नए मतदाताओं को जोड़ा जाता है।
- मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाते हैं।
- पहले से मौजूद रिकॉर्ड को सही और अद्यतन किया जाता है।
इस कदम से मतदाता सूची अधिक पारदर्शी और सटीक बनेगी। चुनाव आयोग का मानना है कि समय पर और गहन पुनरीक्षण से भविष्य के चुनाव अधिक निष्पक्ष और त्रुटिरहित होंगे।
बिहार बना मॉडल, अब देशभर में विस्तार
बिहार में SIR की प्रक्रिया पहले ही सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है। वहां पर मतदाता सूची में सुधार से जुड़े कई सकारात्मक परिणाम सामने आए थे। इसी अनुभव को देखते हुए अब पूरे देश में इसे लागू करने की तैयारी है।
आगे की राह
फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से इस प्रक्रिया की सटीक तारीख तय नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि अधिसूचना जल्द जारी होगी। आयोग चाहता है कि आगामी आम चुनावों से पहले मतदाता सूचियों को पूरी तरह से सटीक और त्रुटिरहित बनाया जा सके।






