राहुल गांधी पर CRPF की सख़्त चिट्ठी! 9 महीने में 6 बार तोड़ा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल, खरगे को भी भेजा पत्र
नई दिल्ली, 11 सितंबर 2025 – कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के डीजी (सिक्योरिटी) ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि राहुल गांधी ने पिछले 9 महीनों में 6 बार विदेश यात्रा करते समय सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ा और बिना सूचना दिए देश से बाहर गए।
क्या है मामला?
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10 सितंबर को लिखे गए इस पत्र में CRPF ने साफ लिखा है कि राहुल गांधी अपनी Z+ with ASL (Advanced Security Liaison) श्रेणी की सुरक्षा का पालन नहीं कर रहे। CRPF ने आरोप लगाया है कि राहुल कई बार Yellow Book सुरक्षा गाइडलाइन का उल्लंघन कर चुके हैं।
प्रोटोकॉल के मुताबिक –
- Z+ सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों को विदेश यात्रा से कम से कम 15 दिन पहले सुरक्षा एजेंसियों को सूचित करना अनिवार्य है।
- इसका उद्देश्य है कि स्थानीय एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर सुरक्षा पुख्ता की जा सके।
लेकिन राहुल गांधी ने बार-बार इस नियम की अनदेखी की।
कौन-कौन से दौरे छिपाए गए?
CRPF की चिट्ठी में विस्तार से लिखा गया है कि राहुल गांधी ने 6 बार विदेश यात्रा की लेकिन एजेंसियों को पहले से कोई जानकारी नहीं दी।
- 30 दिसंबर 2024 – 9 जनवरी 2025 : इटली दौरा
- 12 मार्च – 17 मार्च 2025 : वियतनाम दौरा
- 17 अप्रैल – 23 अप्रैल 2025 : दुबई दौरा
- 11 जून – 18 जून 2025 : दोहा (कतर) दौरा
- 25 जून – 6 जुलाई 2025 : लंदन दौरा
- 4 सितंबर – 8 सितंबर 2025 : मलेशिया दौरा
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CRPF क्यों है नाराज़?
पत्र में कहा गया कि राहुल गांधी देश के अत्यंत संवेदनशील वीवीआईपी में से एक हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा में जरा-सी चूक भी राष्ट्रीय महत्व का विषय बन सकती है।
CRPF ने लिखा कि बार-बार प्रोटोकॉल तोड़ने से –
- उनकी जान को खतरा बढ़ता है।
- सुरक्षा तंत्र पर अतिरिक्त दबाव आता है।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय में कठिनाई होती है।
कांग्रेस अध्यक्ष को भी भेजा गया संदेश
सूत्रों के अनुसार, CRPF ने चिट्ठी में मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी दोनों से अपील की है कि आगे से सुरक्षा प्रोटोकॉल और सभी आवश्यक दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
निष्कर्ष
राहुल गांधी को मिली Z+ सुरक्षा देश की सबसे ऊंची श्रेणी की सुरक्षा मानी जाती है। ऐसे में बार-बार प्रोटोकॉल तोड़ना केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न भी है। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस चिट्ठी पर क्या रुख अपनाती है और राहुल गांधी आगे से सुरक्षा एजेंसियों के साथ कितना समन्वय रखते हैं।






