ताजमहल क्यों ढहाया जा रहा है? पीछे की पूरी कहानी !
अजमेर।
राजस्थान के अजमेर में बना सेवन वंडर पार्क अब इतिहास बनने की ओर है। इस पार्क की सबसे चर्चित संरचना — ताजमहल की प्रतिकृति — को रविवार सुबह से मजदूर हथौड़े और जेसीबी मशीनों से तोड़ रहे हैं। यह नज़ारा देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद रहे।
तीन दिन से जारी इस कार्रवाई ने न सिर्फ स्थानीय लोगों को चौंकाया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा किया है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इस पार्क को जमींदोज क्यों किया जा रहा है?
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सुप्रीम कोर्ट का आदेश बना वजह
सेवन वंडर पार्क का उद्घाटन 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किया था। अजमेर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बने इस पार्क पर 11.64 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इसमें ताजमहल, एफिल टॉवर, पीसा की मीनार, मिस्र का पिरामिड, रोम का कोलोजियम और क्राइस्ट द रिडीमर जैसी प्रतिकृतियां बनाई गई थीं।
लेकिन पार्क का निर्माण वेटलैंड क्षेत्र में होने के आरोप लगे। सुप्रीम कोर्ट ने छह महीने पहले इस निर्माण को पर्यावरण नियमों का उल्लंघन मानते हुए इसे हटाने का आदेश दिया और 17 सितंबर 2025 तक की समयसीमा तय की।
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एक-एक पत्थर से टूटता “ताज”
रविवार सुबह से मजदूर छीनी और हथौड़े लेकर ताजमहल की प्रतिकृति पर चढ़ गए। धीरे-धीरे पत्थरों को ढहाया जा रहा है। प्रशासनिक टीम और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर भी लगाए गए हैं।
इससे पहले पार्क से स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की प्रतिकृति को पूरी तरह हटाया जा चुका है।
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पर्यटकों का पसंदीदा स्थान था पार्क
सेवन वंडर पार्क अजमेर के पर्यटन नक्शे पर तेजी से लोकप्रिय हो गया था। यहां शादी की शूटिंग, फोटोग्राफी और रोज़ाना सैकड़ों पर्यटकों की आवाजाही आम बात थी। लेकिन अब यह जगह मलबे में तब्दील हो रही है।
शिकायत से कोर्ट तक पहुंचा मामला
2023 में अशोक मलिक नाम के शिकायतकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में याचिका दायर की थी। आरोप था कि यह पार्क “डूब क्षेत्र” में अवैध तरीके से बनाया गया है और जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये बर्बाद किए गए हैं।
सुनवाई के बाद अदालत ने अजमेर नगर निगम और जिला प्रशासन को आदेश दिया कि पार्क को हटाया जाए और पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
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नतीजा
ताजमहल की प्रतिकृति सहित अन्य संरचनाओं का हटना एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि क्या विकास परियोजनाओं की प्लानिंग में पर्यावरणीय नियमों को दरकिनार किया जाता है? और क्या करोड़ों रुपये जनता की गाढ़ी कमाई को बर्बाद कर दिया गया?
अजमेर का यह फैसला अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है।






