फ़रवरी 4, 2026

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छत्तीसगढ़ के गांव में ‘हुक्का-पानी बंद’ की सजा: थाने में मासूम बच्चों संग आत्मदाह की कोशिश, पीछे की कहानी

राजनांदगांव।
छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले से दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक ही परिवार की महिलाओं ने दो मासूम बच्चों के साथ थाने में पेट्रोल छिड़ककर सामूहिक आत्मदाह की कोशिश की। वजह चौंकाने वाली है—गांव के दबंगों ने परिवार का “हुक्का-पानी” बंद कर सामाजिक बहिष्कार कर दिया था।

समय रहते पुलिस ने परिवार को बचा लिया, लेकिन इस घटना ने ग्रामीण समाज में जारी सामाजिक दंड और न्याय की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


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क्या है पूरा मामला?

पांगरी गांव की रहने वाली निर्मला बाई साहू अपने परिवार के साथ होटल चलाकर जीवन-यापन करती हैं। आरोप है कि गांव के कुछ दबंग लोगों ने प्रतिस्पर्धा के चलते उनका होटल बंद कराने की कोशिश की और उनके खिलाफ दुष्प्रचार फैलाया कि वहां शराब परोसी जाती है।

परिवार का कहना है कि होटल का संचालन वैध तरीके से किया जा रहा है, लेकिन गांव के दबंग लोग कारोबार बंद कराने पर अड़े हुए हैं।


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थाने में क्यों पहुंचा परिवार?

निर्मला बाई, उनकी बहू रामेश्वरी, बेटी और दो मासूम बच्चों ने थाने में पहुंचकर गांव के दबंगों के खिलाफ शिकायत की। आरोप लगाया गया कि गांव में यह फरमान जारी कर दिया गया है कि जो भी उनके परिवार से बातचीत करेगा, उसे ₹1000 का जुर्माना देना होगा।

कई बार महिला आयोग और प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। निराश होकर परिवार ने पुलिस थाने में ही पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश की।


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थाने में मचा हड़कंप

जैसे ही परिवार ने खुद पर पेट्रोल डाला, थाने का माहौल अफरा-तफरी से भर गया। पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों ने तत्काल उन्हें आत्मदाह से रोका और किसी तरह शांत कराया। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है और दबंगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।


गांव की परंपरा और आधुनिक कानून में टकराव

यह घटना सिर्फ एक परिवार की समस्या नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि आज भी ग्रामीण समाज में “हुक्का-पानी बंद” जैसी कुप्रथाएँ जिंदा हैं। सामाजिक बहिष्कार के चलते परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूट गया, और अंततः उसे आत्महत्या जैसा कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा।


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नतीजा

यह घटना प्रशासन के लिए एक बड़ा सबक है। ग्रामीण क्षेत्रों में दबंगई और सामाजिक दंड की प्रथाओं को खत्म किए बिना इस तरह की घटनाओं को रोकना मुश्किल होगा। अब देखने वाली बात होगी कि जांच के बाद पुलिस और प्रशासन इस परिवार को कितना न्याय दिला पाते हैं।

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