छात्रों की पहचान में नई क्रांति: दुर्ग जिले में बायोमेट्रिक और आधार अपडेशन अभियान से शिक्षा व्यवस्था में आया बड़ा बदलाव | जानिए इस डिजिटल मिशन के पीछे की पूरी कहानी!
दुर्ग, 31 अक्टूबर 2025/
छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला एक बार फिर शिक्षा और डिजिटल सुधारों के क्षेत्र में उदाहरण पेश कर रहा है।
कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के नेतृत्व में जिले में विद्यार्थियों के मैंडेटरी बायोमेट्रिक एवं आधार अपडेशन कार्य ने रफ्तार पकड़ ली है।
यह अभियान न केवल विद्यार्थियों की पहचान को सुरक्षित बना रहा है, बल्कि भविष्य में मिलने वाली शैक्षणिक, छात्रवृत्ति और परीक्षा संबंधी सेवाओं को भी डिजिटल रूप से पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
🎯 अभियान की रूपरेखा और उद्देश्य:
कलेक्टर श्री सिंह के निर्देशानुसार यह विशेष अभियान 29 अक्टूबर से 8 नवम्बर 2025 तक जिले के सभी शासकीय और अशासकीय स्कूलों में चलाया जा रहा है।
इस दौरान प्रत्येक विद्यार्थी का बायोमेट्रिक डेटा (फिंगरप्रिंट और फेस स्कैन) एवं आधार विवरण अपडेट किया जा रहा है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य है—
- विद्यार्थियों की एकीकृत डिजिटल पहचान सुनिश्चित करना।
- भविष्य में छात्रवृत्ति, परीक्षा पंजीयन और ट्रांसफर प्रक्रियाओं में आधार आधारित पारदर्शिता लाना।
- फर्जी नामांकन और डुप्लीकेट रिकॉर्ड्स को समाप्त करना।
- हर छात्र की शैक्षणिक प्रगति का एक यूनिक डिजिटल रिकॉर्ड बनाना।
📊 अभियान की प्रगति — आंकड़ों में सफलता की कहानी:
29 अक्टूबर से अभियान शुरू होने के बाद से ही यह लगातार गति पकड़ रहा है।
- 30 अक्टूबर 2025 को:
👉 1,642 विद्यार्थियों का मैंडेटरी बायोमेट्रिक अपडेशन
👉 292 विद्यार्थियों का आधार अपडेशन किया गया। - 31 अक्टूबर 2025 को:
👉 जिले के 34 केन्द्रों पर विशेष शिविर लगाए गए।
👉 2,043 विद्यार्थियों का बायोमेट्रिक अपडेशन
👉 256 विद्यार्थियों का आधार अपडेशन किया गया।
इन दो दिनों में ही कुल 4,200 से अधिक विद्यार्थियों का डेटा अपडेट किया जा चुका है, जो अभियान की सफलता का प्रमाण है।
🧑💻 कैसे काम कर रहा है यह सिस्टम:
प्रत्येक स्कूल में मोबाइल बायोमेट्रिक डिवाइस और आधार लिंक्ड टैबलेट्स लगाए गए हैं।
शिविरों में विद्यार्थी अपनी पहचान सत्यापित करवा रहे हैं —
- फिंगरप्रिंट और फेस स्कैन
- आधार सत्यापन
- नाम, जन्म तिथि और स्कूल रिकॉर्ड का मिलान
डाटा को सीधे राज्य शिक्षा पोर्टल और UIDAI सर्वर से जोड़ा गया है ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि या दोहराव से बचा जा सके।
🏫 शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के संकेत:
इस बायोमेट्रिक एवं आधार आधारित प्रणाली से—
- विद्यार्थी अब किसी भी स्कूल में प्रवेश या ट्रांसफर लेते समय केवल अपने आधार नंबर से सत्यापित हो सकेंगे।
- शिक्षक उपस्थिति और छात्र उपस्थिति दोनों ही ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम में दर्ज होंगी।
- भविष्य में परीक्षा परिणाम, छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खातों में जाएंगे।
यह पहल शिक्षा प्रणाली को “पेपरलेस और फेक-फ्री” बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।
💬 कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने कहा:
“हमारा लक्ष्य है कि दुर्ग जिला डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बने। बायोमेट्रिक और आधार अपडेशन के जरिए हम विद्यार्थियों की पहचान और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित कर रहे हैं। यह अभियान शिक्षा के डिजिटलीकरण की मजबूत नींव रखेगा।”
🌐 जनभागीदारी और सहयोग:
अभियान में शिक्षा विभाग, जिला ई-गवर्नेंस टीम, UIDAI से अधिकृत ऑपरेटर और स्कूल प्रबंधन की सक्रिय भूमिका है।
पालकों से भी आग्रह किया गया है कि वे अपने बच्चों के आधार कार्ड लेकर स्कूल अवश्य आएँ ताकि अपडेशन कार्य समय पर पूर्ण किया जा सके।
🚀 भविष्य की दिशा:
अभियान के पूर्ण होने के बाद सभी विद्यार्थियों का डेटा एक डिजिटल मास्टर डैशबोर्ड में एकीकृत होगा।
यह डैशबोर्ड स्कूल-वार, ब्लॉक-वार और जिला-वार विद्यार्थियों के डेटा विश्लेषण में उपयोगी होगा।
इससे न केवल प्रशासन को योजनाओं की सटीक जानकारी मिलेगी, बल्कि विद्यार्थियों को मिलने वाली सेवाएँ भी एक क्लिक में उपलब्ध होंगी।
















