दंतेवाड़ा: महेंद्र कर्मा कन्या महाविद्यालय में बालिकाओं के अधिकार व स्वास्थ्य पर जागरूकता कार्यक्रम, पॉन्ड लाइनर तकनीक से बोडो कश्यप बनीं सफल मत्स्य पालक
दंतेवाड़ा | 19 जनवरी 2026:
जिले में महिला एवं बाल सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से Dantewada स्थित Mahendra Karma Kanya Mahavidyalaya में एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जिला स्तरीय महिला सशक्तिकरण केंद्र एवं जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा जिला कार्यक्रम अधिकारी के मार्गदर्शन में किया गया।
कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं को एनीमिया से बचाव, शिक्षा, स्वास्थ्य, अधिकार, सशक्तिकरण एवं सुरक्षा, बाल विवाह की रोकथाम, कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न, सोशल मीडिया पर अनियंत्रित पोस्ट एवं इंफोग्राफिक्स के दुष्प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
इसके साथ ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, महिला हेल्पलाइन 181, सखी वन स्टॉप सेंटर, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, पालन योजना, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम 2005, पोषण एवं देखरेख कार्यक्रम तथा पोस्ट केयर प्रोग्राम जैसी योजनाओं एवं कानूनों की जानकारी दी गई।
⚖️ कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम 2013 पर विशेष सत्र
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा महिलाओं को कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम 2013 के प्रावधानों की जानकारी दी गई। बताया गया कि 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है। समिति गठन नहीं करने पर 50 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
कार्यक्रम में जिला मिशन समन्वयक सरिता देशमुख, संरक्षण अधिकारी रवि शंकर सनाढ्य, काउंसलर शशिकांत झा, महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती अर्चना झा, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी सुश्री तनुजा बेलसरिया सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं।

🌾 सफलता की कहानी: पॉन्ड लाइनर तकनीक से बदली आर्थिक तस्वीर
प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना एवं Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana के प्रभावी क्रियान्वयन से गीदम विकासखंड के मड़से गांव की श्रीमती बोडो कश्यप महिला स्वावलंबन की मिसाल बन गई हैं।
उन्होंने अपनी मात्र 0.10 हेक्टेयर भूमि पर पॉन्ड लाइनर (सेमी बायोफ्लॉक) तकनीक अपनाकर मत्स्य पालन शुरू किया। आधुनिक तकनीक से पानी संरक्षण और मछलियों की तेज़ वृद्धि संभव हुई, जिससे उनका वार्षिक उत्पादन बढ़ा और आय लगभग 2 लाख रुपये तक पहुंच गई।
विभाग द्वारा उन्हें मत्स्याखेट उपकरण, आइस बॉक्स एवं अंगुलिका संचयन जैसी सुविधाएं भी प्रदान की गईं। उनकी सफलता आज जिले की अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।










