भाजपा नेता को न्यायाधीश नियुक्त करने पर उठा सवाल…
मुंबई, छह अगस्त (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम द्वारा भाजपा की पूर्व प्रवक्ता आरती साठे को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद के लिए अनुशंसित करने पर बुधवार को आपत्ति जताई।
पवार ने कहा कि इससे न्यायपालिका की निष्पक्षता प्रभावित होगी।
उन्होंने सवाल किया कि क्या लोग ऐसी स्थिति में न्याय की उम्मीद कर सकते हैं जब वे सरकार के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं और न्यायाधीश सत्तारूढ़ पार्टी का पूर्व सदस्य होता है।
राकांपा (एसपी) महासचिव रोहित पवार ने उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम से अपनी सिफारिश वापस लेने का आग्रह किया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को कहा था कि साठे ने दो साल पहले पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।
पवार ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘एक ऐसे व्यक्ति को न्यायाधीश नियुक्त करना, जिसने सार्वजनिक मंचों पर खुलेआम एक राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व किया हो, लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा आघात है। इससे भारत की न्यायपालिका की निष्पक्षता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।’’
उन्होंने कहा कि कभी टेलीविजन कार्यक्रमों की बहसों में भाजपा का प्रमुख चेहरा रहीं साठे ने भले ही 2024 में पार्टी में अपने पद से इस्तीफा दे दिया हो, लेकिन न्यायिक नियुक्ति प्रक्रिया कई साल पहले ही शुरू हो जाती है।
पवार ने सवाल किया, ‘‘यदि उनका (साठे का) नाम 2025 में प्रस्तावित किया गया है, तो उनका साक्षात्कार 2023 के आसपास हुआ होगा। क्या तब भी वह पार्टी में किसी पद पर थीं? क्या राजनीतिक पृष्ठभूमि वाला कोई न्यायाधीश किसानों की आत्महत्या, भूमि घोटाले या पर्यावरण संबंधी चिंताओं जैसे मुद्दों पर निष्पक्ष फैसला देगा, जिनमें सरकार शामिल हो सकती है?’’
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