महानदी जल विवाद पर नई पहल: दिल्ली में छत्तीसगढ़-ओडिशा की अहम बैठक, दिसंबर तक सीएम स्तर पर समाधान की उम्मीद
नई दिल्ली:
महानदी जल विवाद को सुलझाने के लिए छत्तीसगढ़ और ओडिशा ने एक नई शुरुआत की है। लंबे समय से चले आ रहे इस जटिल विवाद को बातचीत के जरिये हल करने के लिए आज नई दिल्ली में दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों और जल संसाधन विभाग के सचिवों की एक अहम बैठक हुई।
महानदी, जो छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले से निकलती है और ओडिशा से होते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है, पर दशकों से दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर तनाव बना हुआ है। ओडिशा का आरोप रहा है कि छत्तीसगढ़ ने नदी पर कई बांध और बैराज बनाए, जिससे ओडिशा को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। वहीं, छत्तीसगढ़ का कहना है कि उसने सिर्फ अपने हिस्से के पानी का ही उपयोग किया है।

बैठक में क्या हुआ?
बैठक में दोनों राज्यों ने माना कि यह विवाद पुराना और पेचीदा है, लेकिन लोगों और राज्यों के भले के लिए समाधान निकालना बेहद जरूरी है। सहमति बनी कि तकनीकी स्तर पर बातचीत आगे बढ़ाई जाएगी और सितंबर 2025 से दोनों राज्यों की तकनीकी समितियां हर हफ्ते बैठक करेंगी।
इन समितियों में इंजीनियर और जल संसाधन विशेषज्ञ शामिल होंगे, जो मुख्य मुद्दों की पहचान करेंगे और उनका समाधान सुझाएंगे। समितियां यह भी देखेगीं कि किस तरह दोनों राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बन सके और नदी के जल संसाधनों का न्यायपूर्ण उपयोग हो।
अक्टूबर में अगली बैठक, दिसंबर में सीएम मिलेंगे
आज की बैठक में यह भी तय हुआ कि अक्टूबर 2025 में दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और जल संसाधन सचिव फिर मिलेंगे और अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे। अगर सब कुछ योजना के अनुसार आगे बढ़ा तो दिसंबर 2025 में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्री आमने-सामने बैठकर अंतिम रूपरेखा पर निर्णय ले सकते हैं।
समाधान बनेगा नजीर?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर छत्तीसगढ़ और ओडिशा आपसी सहमति से महानदी जल विवाद का समाधान निकाल लेते हैं तो यह पूरे देश के लिए एक नजीर साबित होगा। यह दिखाएगा कि बड़े और पुराने विवाद भी राजनीतिक इच्छाशक्ति और ईमानदारी से बातचीत के जरिए सुलझाए जा सकते हैं।
फिलहाल उम्मीदें इस ओर टिकी हैं कि आगामी महीनों में बैठकों की इस श्रृंखला से कोई ठोस रास्ता निकलेगा, जिससे महानदी के किनारे बसे लाखों लोगों को राहत मिलेगी।

महानदी जल विवाद: शुरुआत से समाधान की कोशिश तक की टाइमलाइन
🔹 विवाद की पृष्ठभूमि
- महानदी नदी का उद्गम – छत्तीसगढ़ (रायपुर जिले) से निकलकर ओडिशा से होती हुई बंगाल की खाड़ी में मिलती है।
- विवाद की जड़ – ओडिशा का आरोप कि छत्तीसगढ़ ने महानदी पर कई बांध और बैराज बनाए हैं, जिससे ओडिशा तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचता।
- छत्तीसगढ़ का पक्ष – राज्य का कहना है कि उसने सिर्फ अपने हिस्से के पानी का ही उपयोग किया है।
🔹 मुख्य घटनाक्रम
- 1990s से 2000s – छत्तीसगढ़ में महानदी पर बड़े पैमाने पर बांध और बैराजों का निर्माण शुरू हुआ।
- 2016 – विवाद चरम पर पहुंचा; ओडिशा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और केंद्र सरकार से मध्यस्थता की मांग की।
- 2018 – केंद्र सरकार ने महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (Mahanadi Water Disputes Tribunal) का गठन किया।
🔹 नए सिरे से पहल (2025)
- 30 अगस्त 2025, नई दिल्ली –
- छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्य सचिवों और जल संसाधन सचिवों की बैठक हुई।
- दोनों राज्यों ने माना कि विवाद पुराना और कठिन है, लेकिन समाधान निकालना जरूरी है।
🔹 बैठक में लिए गए फैसले
- सितंबर 2025 से – तकनीकी समितियां हर हफ्ते बैठक करेंगी।
- इनमें इंजीनियर और विशेषज्ञ शामिल होंगे।
- समितियां मुख्य मुद्दों की पहचान कर समाधान सुझाएंगी।
- अक्टूबर 2025 –
- दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और जल संसाधन सचिव फिर बैठक करेंगे।
- अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
- दिसंबर 2025 –
- छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्री मुलाकात करेंगे।
- अंतिम रूपरेखा और संभावित समाधान पर निर्णय लिया जाएगा।

🔹 संभावित असर
- अगर समझौता होता है तो लाखों लोगों को पानी की समस्या से राहत मिलेगी।
- यह पूरे देश के लिए एक नजीर बनेगा कि बड़े विवाद भी बातचीत और सहयोग से सुलझाए जा सकते हैं।
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