जुलाई 30, 2026

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रायबरेली में राहुल गांधी के दौरे पर बीजेपी का हंगामा: विरोध के पीछे क्या है असली सियासी मंशा?

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जब बुधवार को अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली पहुंचे, तो वहां अचानक राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया। बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले का विरोध किया और ‘राहुल गांधी वापस जाओ’ के नारे लगाए। हालांकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का मानना है कि यह विरोध राहुल गांधी की लोकप्रियता और बढ़ते जनसमर्थन से डरकर रचा गया राजनीतिक ड्रामा है।

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राहुल गांधी के खिलाफ सियासी माहौल बनाने की कोशिश

बीजेपी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बिहार की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपशब्द कहे गए। लेकिन कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी ने ऐसा कुछ नहीं कहा और यह केवल उनके खिलाफ झूठा प्रचार है। जानकारों का मानना है कि रायबरेली जैसे परंपरागत कांग्रेस गढ़ में राहुल गांधी की सक्रियता बीजेपी को असहज कर रही है, इसलिए उन्हें बदनाम करने के लिए ऐसे मुद्दे उछाले जा रहे हैं।

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मंत्री दिनेश प्रताप सिंह का विरोध

यूपी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह भी इस विरोध में शामिल रहे। उन्होंने मीडिया से कहा कि राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए। लेकिन कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि यह सब केवल राजनीतिक बयानबाज़ी है, जिसका मकसद राहुल गांधी की छवि को धूमिल करना है।

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पुलिस और विरोध प्रदर्शन

हरचंदपुर थाना क्षेत्र के बटोही होटल के पास हुए इस विरोध में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। इस दौरान अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस को स्थिति संभालनी पड़ी। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी अपने कार्यक्रम के सिलसिले में पहुंचे थे, लेकिन जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश की गई।

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राहुल गांधी का बढ़ता जनसमर्थन

रायबरेली में इस विरोध के बावजूद राहुल गांधी को लोगों का जबरदस्त समर्थन मिला। उनके समर्थक बड़ी संख्या में कार्यक्रमों में मौजूद रहे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी की रणनीति राहुल गांधी को विवादों में उलझाने की है, ताकि उनके जनसंपर्क और मुद्दों पर आधारित राजनीति को दबाया जा सके।

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आगे का सवाल

इस घटना ने साफ कर दिया है कि राहुल गांधी जैसे-जैसे जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं, वैसे-वैसे उनके खिलाफ विरोध की राजनीति और तेज़ होगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस तरह के विरोध से उनकी लोकप्रियता वाकई कम होगी, या फिर राहुल गांधी और मजबूत होकर उभरेंगे?

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