अमेरिकी टैरिफ की मार से तिरुप्पुर इंडस्ट्री कराह रही, CM स्टालिन का मोदी पर हमला तो BJP का पलटवार – निर्यातकों को 3,000 करोड़ का नुकसान
चेन्नई/नई दिल्ली। तमिलनाडु का तिरुप्पुर, जिसे भारत की होज़ियरी कैपिटल कहा जाता है, इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार द्वारा भारतीय सामान पर 50% तक टैरिफ लगाने के फैसले ने इस उद्योग को झकझोर कर रख दिया है। लाखों लोगों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है और अब तक लगभग 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया जा चुका है।

मजदूरों का प्रदर्शन और उद्योग की हालत
तिरुप्पुर की टेक्सटाइल और गारमेंट इंडस्ट्री में लाखों मजदूर कार्यरत हैं। अमेरिकी टैरिफ के बाद निर्यातक ऑर्डर पूरे करने में असमर्थ हो रहे हैं, जिससे हजारों मजदूरों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया तो यह संकट स्थायी नुकसान में बदल सकता है।
स्टालिन का मोदी पर तीखा हमला
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, जो इन दिनों यूरोप के आधिकारिक दौरे पर हैं, ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों केंद्र सरकार सस्ते रूसी तेल की सप्लाई गुजरात की रिफाइनरियों तक सीमित रखती है, जबकि तिरुप्पुर के निर्यातक अमेरिकी टैरिफ की मार झेल रहे हैं।
स्टालिन ने तमिल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा:
“गुजरात की रिफाइनरियों को सस्ते तेल का फायदा दिलाने के लिए क्या आप हमारे उन निर्यातकों को बर्बाद होने देंगे जो लाखों नौकरियां पैदा करते हैं? तुरंत राहत की घोषणा करें, अमेरिका से बातचीत करें और अपने ‘विश्वगुरु’ का खिताब सच साबित करें।”

उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने पहले भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर राहत पैकेज की मांग की थी, जिसमें कोविड-19 काल की तरह छूट और स्थगन शामिल थे।
बीजेपी का पलटवार
स्टालिन के आरोपों पर बीजेपी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। पार्टी प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने कहा,
“यह आश्चर्य की बात है कि एक मुख्यमंत्री न तो अर्थव्यवस्था समझते हैं और न ही राजनीति। उनकी टिप्पणियां अपरिपक्व और दुर्भाग्यपूर्ण हैं।”
बीजेपी का कहना है कि केंद्र सरकार स्थिति पर नज़र रख रही है और विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए इसे मुद्दा बना रहा है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक बयानबाज़ी से आगे बढ़कर असली चुनौती समय की है। एक इंडस्ट्री एनालिस्ट ने चेताया कि अगर प्रधानमंत्री मोदी ने सीधे वॉशिंगटन से बातचीत नहीं की तो तिरुप्पुर जैसे भारत के प्रमुख निर्यात केंद्रों को होने वाला नुकसान बहुत देर होने से पहले अपूरणीय साबित हो जाएगा।
तिरुप्पुर की होजियरी और टेक्सटाइल इंडस्ट्री भारत के निर्यात का बड़ा हिस्सा है। ऐसे में अमेरिकी टैरिफ न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है।
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