शहबाज-मुनीर के SCO समिट से लौटते ही चीन का बड़ा ऐलान, पाकिस्तान संग बनाएगी सुरक्षा की नई रणनीति
चीन और पाकिस्तान ने आपसी सुरक्षा एवं रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाने का निर्णय लिया है। दोनों देशों ने आतंकवाद पर अंकुश लगाने और द्विपक्षीय परियोजनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त कार्य योजना तैयार की है। यह ऐलान ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर हाल ही में चीन के दौरे से लौटे हैं।
SCO समिट के बाद बड़ा कदम
चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्य योजना प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बीजिंग यात्रा के दौरान बनी, जहां उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य शीर्ष चीनी अधिकारियों से मुलाकात की। इस बैठक में पाकिस्तान में चल रही अरबों डॉलर की चीनी परियोजनाओं और वहां कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर विशेष चर्चा हुई।

बेल्ट एंड रोड परियोजना और सुरक्षा की चुनौती
पाकिस्तान चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का अहम केंद्र है। खासतौर पर चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत चीन ने पिछले एक दशक में पाकिस्तान में बिजली घर, सड़कें और ग्वादर बंदरगाह जैसे कई रणनीतिक प्रोजेक्ट विकसित किए हैं। लेकिन इन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे चीनी नागरिक लगातार आतंकवादियों और अलगाववादी समूहों के निशाने पर रहे हैं।
बीते वर्षों में कई हमलों में चीनी कर्मचारियों की मौत हो चुकी है, जिससे बीजिंग की चिंता बढ़ गई है। यही वजह है कि शी जिनपिंग ने पाकिस्तान से अपील की है कि वह न केवल सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाए बल्कि चीनी सुरक्षा कर्मियों को भी पाकिस्तान में काम करने की अनुमति दे।
चीन की दो टूक
शी जिनपिंग ने कहा—
“चीन पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी प्रयासों का समर्थन करता है। हम उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तान चीनी नागरिकों, परियोजनाओं और संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाएगा। इससे द्विपक्षीय सहयोग को एक सुरक्षित वातावरण मिलेगा।”

पाकिस्तान की तैयारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने पहले ही हजारों सैनिकों, अर्धसैनिक बलों और पुलिस को चीनी परियोजनाओं और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए तैनात किया है। इसके बावजूद चीन असंतुष्ट है और वह चाहता है कि अपने सुरक्षा विशेषज्ञों को भी मौके पर तैनात कर सके।
भारत के लिए क्यों बढ़ी टेंशन?
चीन और पाकिस्तान का यह नया सुरक्षा गठजोड़ भारत के लिए चिंता का विषय है। एक ओर यह सहयोग CPEC परियोजनाओं को और मजबूती देगा, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है। दूसरी ओर, इससे चीन-पाकिस्तान रक्षा साझेदारी और गहरी होगी, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान में चीनी सुरक्षा बलों को अनुमति मिलती है, तो यह सीधे भारत की सीमा के करीब चीन की उपस्थिति को बढ़ा देगा। यह भारत की सुरक्षा रणनीति के लिए एक नई चुनौती होगी।
चीन-पाकिस्तान की नई सुरक्षा रणनीति से भारत की बढ़ी चिंता, जानिए क्यों
चीन और पाकिस्तान ने हाल ही में सुरक्षा एवं रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए संयुक्त कार्य योजना पर सहमति जताई है। यह कदम उस समय आया है जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर बीजिंग दौरे से लौटे। इस रणनीति का उद्देश्य पाकिस्तान में चीनी परियोजनाओं और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
भारत पर संभावित असर
यह नया समझौता केवल पाकिस्तान और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नहीं बल्कि भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति को भी सीधे प्रभावित कर सकता है। इसके पीछे कई बड़ी वजहें हैं:

- CPEC और PoK विवाद
- चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (CPEC) पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है।
- भारत पहले से ही इस पर कड़ा विरोध जता चुका है, क्योंकि इसे उसकी संप्रभुता का उल्लंघन माना जाता है।
- अब अगर इस क्षेत्र में चीनी सुरक्षा बलों की तैनाती होती है, तो यह सीधे भारत की उत्तरी सीमा पर चीन की उपस्थिति को और मजबूत कर देगा।
- भारत की सीमा पर दोहरा दबाव
- भारत पहले से ही पूर्वी लद्दाख और अरुणाचल में चीन के साथ सीमा विवाद झेल रहा है।
- पाकिस्तान के साथ भी नियंत्रण रेखा (LoC) पर तनाव कायम रहता है।
- चीन-पाकिस्तान का यह सुरक्षा गठजोड़ भारत को दो मोर्चों पर दबाव में डाल सकता है।
- दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन
- चीन की इस पहल से पाकिस्तान को आर्थिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर मजबूती मिलेगी।
- इससे दक्षिण एशिया में रणनीतिक शक्ति संतुलन बदल सकता है, जो भारत की विदेश नीति और रक्षा नीति के लिए बड़ी चुनौती है।
- भारतीय परियोजनाओं के लिए खतरा
- चीन जिस तरह से पाकिस्तान में निवेश और सुरक्षा को लेकर सक्रिय है, उससे पड़ोसी देशों—नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका—में भी उसका प्रभाव बढ़ रहा है।
- यह भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और पड़ोसी देशों में विकास सहयोग की योजनाओं को चुनौती दे सकता है।
विशेषज्ञों की राय
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि चीन-पाकिस्तान की यह नई रणनीति भारत के लिए कूटनीतिक और सुरक्षा दोनों स्तरों पर चेतावनी है।
भारत को एक ओर अपनी सीमाओं पर सतर्क रहना होगा, वहीं दूसरी ओर अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे साझेदारों के साथ क्वाड के माध्यम से रणनीतिक सहयोग को और गहरा करना होगा।
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