चक्रधर समारोह 2025 का भव्य समापन
पद्मश्री कैलाश खेर के सूफियाना अंदाज़ और नलिनी-कमलिनी की कथक प्रस्तुति से गूंजा रायगढ़
रायगढ़, 05 सितम्बर 2025।
रायगढ़ में आयोजित 40वें अंतरराष्ट्रीय चक्रधर समारोह 2025 का समापन संगीत और नृत्य की अविस्मरणीय संध्या के रूप में दर्ज हो गया। समापन दिवस पर मंच पर एक ओर जहाँ पद्मश्री कैलाश खेर और उनका बैंड कैलासा अपनी सूफियाना गायकी और लोकधुनों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर पद्मश्री नलिनी-कमलिनी बहनों की अद्भुत कथक प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कैलाश खेर और कैलासा की अद्भुत प्रस्तुति
लगभग दो दशकों से भारतीय संगीत जगत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले कैलाश खेर ने समापन अवसर पर अपनी सबसे लोकप्रिय रचनाओं की प्रस्तुति दी।
- तेरी दीवानी, अल्लाह के बंदे, पिया घर आवेंगे, मेरी मां, हाथों की लकीरें बदल जाएंगी, तेरी सखी मंगल गौरी और बम लहरी जैसे गीतों ने पंडाल में अद्वितीय उत्साह भर दिया।
- हर गीत पर तालियों की गड़गड़ाहट और दर्शकों का उल्लास वातावरण को जीवंत करता रहा।
- उनकी गायकी में लोकसंगीत की मिठास और सूफियाना रूहानियत का संगम देखने को मिला।
कैलाश खेर अब तक 20 से अधिक भाषाओं में 2000 से ज्यादा गीत गा चुके हैं और 2000 से अधिक लाइव कॉन्सर्ट प्रस्तुत कर चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वच्छ भारत अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाए गए और सबसे कम उम्र में पद्मश्री सम्मान पाने वाले इस कलाकार ने भारतीय लोकधुनों को नई पहचान दिलाई है।
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नलिनी-कमलिनी की कथक प्रस्तुति
समारोह के समापन दिवस पर पद्मश्री नलिनी-कमलिनी बहनों ने अपनी कथक प्रस्तुति से दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
- उनकी नृत्य-शैली में भाव, लय और अभिव्यक्ति की अद्वितीय पूर्णता देखने को मिली।
- कथक गुरु पं. जितेन्द्र महाराज की इन शिष्याओं की प्रस्तुति ने भारतीय कला, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत दर्शन कराया।
- उन्होंने सूरदास, तुलसीदास, कबीर, रहीम, बुल्लेशाह और अमीर खुसरो जैसे संत कवियों की रचनाओं को कथक की भाषा देकर एक नया आयाम प्रस्तुत किया।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार
नलिनी-कमलिनी बहनों ने ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, स्पेन, नार्वे, जर्मनी और मध्य-पूर्व देशों में अपनी कला का लोहा मनवाया है।
- ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज, मैनचेस्टर और लीडेन जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालयों में अपने व्याख्यान-प्रदर्शन के जरिए उन्होंने भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया।
- इन्हें उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी और भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय सहित कई संस्थानों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
- दिल्ली दूरदर्शन की टॉप ग्रेड कलाकारों में शामिल इस युगल ने एक शैक्षिक वृत्तचित्र भी तैयार किया है।
सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव
चक्रधर समारोह के इस समापन ने रायगढ़ को एक बार फिर संगीत और नृत्य की राजधानी में बदल दिया। सूफियाना गीतों और कथक नृत्य की सम्मोहक प्रस्तुति ने न केवल दर्शकों को रोमांचित किया, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर की गहराई और गरिमा को भी उजागर किया।
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