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जशपुर के जनजातीय युवा करेंगे हिमालयी चोटियों पर ऐतिहासिक चढ़ाई

मियार वैली ट्राइबल अल्पाइन एक्सपेडिशन 2025 बनेगा प्रदेश और देश की प्रेरणा

जशपुरनगर, 25 अगस्त 2025।
छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और घने वनों के लिए जाना जाता है, अब एक नए इतिहास की गवाही देने जा रहा है। पहली बार प्रदेश सरकार की पहल पर जनजातीय युवाओं की टीम हिमालय की मियार वैली की चोटियों पर अल्पाइन शैली में रॉक क्लाइम्बिंग अभियान के लिए निकलने की तैयारी कर रही है।

मियार वैली ट्राइबल अल्पाइन एक्सपेडिशन 2025 केवल एक पर्वतारोहण अभियान नहीं है, बल्कि यह जनजातीय युवाओं के साहस और क्षमता का प्रतीक बनकर प्रदेश और देश के लिए प्रेरणा की नई कहानी लिख रहा है।

चयनित पाँच युवा

अभियान के लिए अंतिम चरण में पाँच युवाओं का चयन हुआ है –

  • रुसनाथ भगत – एम.ए. हिस्ट्री छात्र, एनसीसी कैडेट और लोकप्रिय “नेपोलियन चाउमिन सेंटर” के संचालक।
  • तेजल भगत – एम.एससी. बॉटनी छात्रा, गाँव बस्ता में शिक्षा और बाल अधिकारों के लिए सक्रिय।
  • सचिन कुजूर – एम.ए. हिस्ट्री छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और पारंपरिक वाद्य मंडार के वादक।
  • प्रतीक – बी.कॉम स्नातक, एनएसएस वालंटियर और खेती व पारिवारिक दुकान से जुड़े।
  • रवि सिंह – बाइक मैकेनिक, साइक्लिंग प्रेमी और “देश देखा क्लाइम्बिंग को.” के संस्थापक सदस्य।

कठोर प्रशिक्षण और सहयोग

टीम को जशपुर के जंगलों और चट्टानों में कैंपिंग, ट्रेड क्लाइम्बिंग, वाइल्डरनेस फर्स्ट एड और माउंटेन एथिक्स जैसी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में भारत और विदेश के अनुभवी प्रशिक्षक शामिल रहे।

अभियान को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और संस्थाओं से भी सहयोग मिला है। पेटज़ल आधिकारिक उपकरण प्रायोजक है, जबकि हिरा ग्रुप ने प्रमुख स्पॉन्सर के रूप में जिम्मेदारी संभाली है। इसके अलावा रनर्सग्च, बार्सिलोना क्लाइम्ब्स, मिस्टिक हिमालयन ट्रेल्स और कई अन्य संस्थानों ने सहयोग दिया है।

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31 अगस्त को प्रस्थान

टीम 31 अगस्त को जशपुर से हिमाचल प्रदेश के लिए रवाना होगी। एक महीने के इस अभियान में ये जनजातीय युवा देश-विदेश के पर्वतारोहियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चढ़ाई करेंगे।

यह पहल साबित कर रही है कि सही अवसर और सहयोग मिलने पर गाँव और जंगलों से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्वतारोही निकल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान भारतीय हिमालयी पर्वतारोहण की दिशा बदलने वाला साबित हो सकता है।

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