नेपाल की सड़कों से निकला फैसला: क्यों चुनी गईं सुशीला कार्की Gen-Z की अंतरिम नेता?
Story:
नेपाल में पिछले कई हफ्तों से चल रहे Gen-Z आंदोलन का असर अब राजनीतिक दिशा तय करता दिख रहा है। राजधानी काठमांडू से लेकर छोटे कस्बों तक फैले इस आंदोलन ने सरकार को गिरा दिया और सेना को नियंत्रण अपने हाथ में लेना पड़ा। लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस अराजक माहौल में देश की बागडोर किसे सौंपी जाएगी।
युवाओं ने इसका जवाब खोज लिया है। बुधवार को हुई एक वर्चुअल मीटिंग में 4,000 से अधिक युवाओं ने भाग लिया और देश की अंतरिम नेता के रूप में पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की के नाम पर सहमति बन गई।
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ऑनलाइन वोटिंग और नतीजा
Gen-Z ग्रुप की इस वर्चुअल बैठक में सुशीला कार्की को 31% वोट मिले। वहीं काठमांडू के मेयर और चर्चित रैपर बालेन शाह को 27% वोट हासिल हुए। यह प्रस्ताव अब आर्मी चीफ को सौंपा जाएगा। माना जा रहा है कि सेना और राष्ट्रपति से बातचीत से पहले Gen-Z ने यह फैसला कर अपनी गंभीरता और संगठन क्षमता दिखा दी है।
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कौन हैं सुशीला कार्की?
सुशीला कार्की नेपाल की ऐसी शख्सियत हैं, जिनका नाम न्यायपालिका और जनआंदोलनों दोनों से जुड़ा रहा है। वे नेपाल सुप्रीम कोर्ट की पहली और अब तक की एकमात्र महिला मुख्य न्यायाधीश रही हैं।
- कार्की ने 11 जुलाई 2016 को मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला।
- 2017 में उनके खिलाफ माओवादी केंद्र और नेपाली कांग्रेस ने संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाया, लेकिन जनता के दबाव और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह प्रस्ताव वापस लेना पड़ा।
- वे अपने साहसिक और स्वतंत्र फैसलों के लिए जानी जाती हैं।
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निजी जीवन और शिक्षा
- कार्की विराटनगर के एक प्रमुख परिवार से ताल्लुक रखती हैं और सात भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं।
- उनकी शादी दुर्गा प्रसाद सुबेदी से हुई थी, जो कभी नेपाली कांग्रेस के लोकप्रिय युवा नेता रहे।
- दुर्गा सुबेदी का नाम पंचायत शासन के खिलाफ आंदोलनों और एक ऐतिहासिक विमान अपहरण घटना से भी जुड़ा रहा है।
शिक्षा की बात करें तो:
- 1972 में उन्होंने विराटनगर से बीए किया।
- 1975 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी से राजनीति विज्ञान में एमए किया।
- 1978 में त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल से कानून की डिग्री प्राप्त की।
- 1979 से उन्होंने विराटनगर में वकालत शुरू की।
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पेशेवर सफर
- 1985 में धरान के महेंद्र मल्टीपल कैंपस में सहायक शिक्षिका बनीं।
- 2007 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा मिला।
- 2009 में सुप्रीम कोर्ट में एड-हॉक जस्टिस नियुक्त हुईं और 2010 में स्थायी जस्टिस बनीं।
- 2016 में वे कार्यवाहक और फिर मुख्य न्यायाधीश बनीं।
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आगे की राह
Gen-Z के इस फैसले ने नेपाल की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। पहली बार देश के युवाओं ने अपने नेता का चुनाव खुद किया है और सेना के सामने एक ठोस नाम रखा है। अब देखना होगा कि क्या सेना और राष्ट्रपति इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, और क्या नेपाल एक महिला नेतृत्व के हाथों में अपनी अंतरिम बागडोर सौंपने को तैयार है।
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