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नेपाल में आज़ादी की आड़ या अराजकता? सोशल मीडिया बैन से शुरू हुआ विरोध, अब जेल तोड़कर 6 हजार कैदी फरार

काठमांडू, 10 सितम्बर 2025।
नेपाल इस समय अब तक के सबसे भयावह राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुआ जन-जी (Gen-Z) का आंदोलन अब हिंसा, आगजनी और अराजकता में बदल चुका है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि देशभर में कर्फ्यू लगा दिया गया है और सेना को नियंत्रण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


हिंसा ने ली 20 से ज्यादा जानें

प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच लगातार झड़पें हो रही हैं। अब तक 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद भी शांत नहीं हुआ है। राजधानी काठमांडू और अन्य बड़े शहरों में सरकारी इमारतों, दफ्तरों और वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया है।


जेलों से कैदियों का सामूहिक पलायन

नेपाल की स्थिति को और खतरनाक बना रही है 18 जिलों की जेल से करीब 6 हजार कैदियों का फरार होना
लिस्ट के अनुसार—

  • कास्की से 773 कैदी
  • चितवन से 700 कैदी
  • कैलाली से 612 कैदी
  • जलेश्वर से 576 कैदी
  • नवलपरासी से 500 कैदी

और अन्य जिलों से भी सैकड़ों कैदी फरार हुए हैं। यह स्थिति नेपाल की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानी जा रही है क्योंकि इनमें से कई कैदी खतरनाक अपराधी भी हो सकते हैं।


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क्यों भड़की आग?

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ है नेपाल सरकार का हालिया फैसला—
सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और एक्स (ट्विटर) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाया था। वजह यह बताई गई कि इन कंपनियों ने नेपाल सरकार के साथ पंजीकरण की सात दिन की समयसीमा का पालन नहीं किया।
सरकार का कहना था कि यह कदम फर्जी खबरों, अवैध गतिविधियों और अफवाहों पर रोक लगाने के लिए जरूरी है।
लेकिन युवा वर्ग, खासकर जन-जी (Gen-Z) ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया। उनका आरोप है कि सरकार असल मुद्दों—बेरोजगारी और भ्रष्टाचार—से ध्यान हटाने के लिए आवाज दबाना चाहती है।

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राष्ट्रपति आवास भी निशाने पर

आक्रोशित भीड़ ने कई सरकारी दफ्तरों को जला दिया है और राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास भी आगजनी की चपेट में आ चुका है। जगह-जगह धुएं के गुबार और राख के ढेर इस संकट की भयावहता बयान कर रहे हैं।


सेना के हाथों में कमान

स्थिति को देखते हुए नेपाल सरकार ने पूरे देश में कर्फ्यू लागू कर दिया है। सड़कों पर सेना गश्त कर रही है, लेकिन प्रदर्शनकारी लगातार भारी संख्या में जुटकर विरोध जारी रखे हुए हैं।


निष्कर्ष

नेपाल में सोशल मीडिया बैन से शुरू हुआ विरोध अब लोकतंत्र और अस्तित्व के संकट में बदल चुका है। हजारों कैदियों का जेल से फरार होना और सरकारी ढांचे का ढहना नेपाल को लंबे समय तक अस्थिर कर सकता है। आने वाले दिन इस बात का फैसला करेंगे कि यह आंदोलन नई आज़ादी की शुरुआत साबित होगा या पूरे देश को अराजकता की आग में झोंक देगा।

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