अब मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए ‘कागजों की झंझट खत्म’? जानिए SIR 2.0 के नए नियमों में क्या है खास और बिहार से कैसे अलग होगा यह अभियान
नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2025।
भारत में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का दूसरा बड़ा चरण SIR 2.0 यानी Systematic Intensive Revision शुरू होने जा रहा है, और इस बार इसमें बहुत कुछ बदल गया है। सबसे बड़ा बदलाव — अब हर किसी को पहचान पत्र या दस्तावेज़ लेकर भागदौड़ नहीं करनी होगी। निर्वाचन आयोग ने व्यवस्था को आसान, डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
चार नवंबर से शुरू होकर चार दिसंबर तक चलने वाले इस दूसरे चरण में देश के 12 राज्यों में मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण होगा। आयोग 9 दिसंबर को मसौदा मतदाता सूची और 7 फरवरी को अंतिम सूची जारी करेगा। इस प्रक्रिया में करीब 51 करोड़ मतदाता शामिल होंगे।
📱 अब नहीं दिखाने होंगे कागज़
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि बिहार में हुए SIR के अनुभव से सीख लेकर अब पूरे सिस्टम को डिजिटल बना दिया गया है। पहले Enumeration Form भरते समय मतदाताओं से पहचान प्रमाण पत्र जैसे कागज मांगे जाते थे, लेकिन अब यह बाध्यकारी नहीं होगा।
यदि किसी व्यक्ति का नाम पुराने और नए मतदाता सूची में ऑटोमैटिक मैपिंग सिस्टम के जरिए मिलान हो जाता है, तो उससे कोई दस्तावेज़ नहीं मांगा जाएगा। केवल वे लोग, जिनका नाम और उनके माता-पिता का नाम पुराने डेटा से मेल नहीं खाएगा, उन्हें 12 मान्य दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत करना होगा।
आयोग के मुताबिक़, लगभग 60 से 70 प्रतिशत नामों की पहचान स्वचालित प्रणाली से पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है, जिससे फर्जीवाड़े की संभावना बहुत कम हो जाएगी। मतदाता अपने नाम की स्थिति चुनाव आयोग की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर भी जांच सकेंगे।
🧾 आधार कार्ड और स्कैनिंग ऑप्शन जोड़ा गया
बिहार से सीख लेते हुए अब आधार कार्ड को दस्तावेज़ सूची में जोड़ा गया है। साथ ही मतदाता को अब दस्तावेज़ की फोटोकॉपी नहीं, बल्कि स्कैन करने का विकल्प दिया गया है। आयोग का मानना है कि इससे फॉर्म भरने और दस्तावेज़ सत्यापन की प्रक्रिया तेज और पेपरलेस हो जाएगी।
🗳️ असम में क्यों नहीं होगा SIR 2.0
हालांकि, SIR 2.0 देश के सभी राज्यों में नहीं हो रहा है। असम में नागरिकता (NRC) और नागरिकता अधिनियम से जुड़े विशेष प्रावधानों के कारण फिलहाल यह प्रक्रिया स्थगित रहेगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि असम के लिए अलग से पुनरीक्षण आदेश और नई तारीखें घोषित की जाएंगी, क्योंकि वहाँ मतदाता सूची का सत्यापन उच्चतम न्यायालय की निगरानी में चल रहा है।
🧩 अब नहीं होगी डुप्लीकेशन की दिक्कत
बिहार में पहली बार हुई प्रक्रिया के दौरान कुछ क्षेत्रों में “डुप्लीकेट एंट्री” यानी Deduplication की समस्या सामने आई थी। इस बार चुनाव आयोग ने उस गलती को सुधार लिया है। एकीकृत डिजिटल सिस्टम यह सुनिश्चित करेगा कि कोई मतदाता एक से अधिक जगह से Enumeration Form न भर सके। जो व्यक्ति दो जगह से फॉर्म भरेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
🗓️ SIR की समय-रेखा
- 4 नवंबर 2025: गणना प्रक्रिया (Enumeration) शुरू
- 4 दिसंबर 2025: गणना प्रक्रिया समाप्त
- 9 दिसंबर 2025: मसौदा मतदाता सूची जारी
- 7 फरवरी 2026: अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित
📍कौन-कौन से राज्य शामिल
दूसरे चरण में देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। चुनाव आयोग ने कहा कि ये वे राज्य हैं जहाँ मतदाता सूचियों का पिछला गहन पुनरीक्षण 2002 से 2004 के बीच हुआ था। अब यह नया SIR 2.0 उनके लिए “कट-ऑफ रेफरेंस” का काम करेगा।
🗣️ बंगाल विवाद पर आयोग का जवाब
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, “आयोग और राज्य सरकार के बीच कोई टकराव नहीं है। SIR प्रक्रिया संविधान के तहत हमारा दायित्व है और राज्य सरकार का दायित्व है कि वह आवश्यक कर्मी उपलब्ध कराए।”
🌐 क्यों कहा जा रहा है यह चुनाव सुधारों की दिशा में सबसे बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि SIR 2.0 से भारत की मतदाता सूची अधिक शुद्ध, पारदर्शी और डिजिटल रूप से सशक्त बनेगी। अब डुप्लीकेट नाम हटेंगे, पुराने नाम सुधरेंगे और नए मतदाताओं को आसानी से शामिल किया जा सकेगा — वह भी बिना किसी “कागज़ी दौड़भाग” के।
🔍 निष्कर्ष
चुनाव आयोग के इस नए प्रयोग से देश में मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में डिजिटल परिवर्तन का एक नया अध्याय जुड़ गया है।
अब “कागज़ नहीं, सिस्टम बोलेगा” — और यही SIR 2.0 की असली पहचान होगी।
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