खाद घोटाले का बड़ा खुलासा: किसानों के नाम पर खेली गई गड़बड़ी, कार्रवाई की तलवार लटकी
दुर्ग, 10 सितम्बर 2025: किसानों की मेहनत और भरोसे से खिलवाड़ करने वाले उर्वरक विक्रेताओं पर अब शिकंजा कसना शुरू हो गया है। जिला बालोद के विकासखण्ड गुरूर के मेसर्स राठी रासायनिक खाद भण्डार अरमरीकला और मेसर्स गांधी कृषि केन्द्र पर किसानों के नाम पर उर्वरक की हेराफेरी और कालाबाजारी का बड़ा मामला सामने आया है।

किसानों के नाम पर गड़बड़ी का खेल
संयुक्त संचालक कृषि, दुर्ग के निर्देश पर गठित निरीक्षण दल ने जब विक्रेताओं के रिकॉर्ड और किसानों से वास्तविक जानकारी जुटाई, तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं। पाया गया कि किसानों द्वारा खरीदी गई वास्तविक खाद की मात्रा से कई गुना अधिक खाद उनकी आईडी पर पीओएस मशीन में दर्ज की गई। इतना ही नहीं, कई किसानों ने तो उस प्रतिष्ठान से खाद खरीदी ही नहीं थी, फिर भी उनके नाम से उर्वरक का विक्रय दिखाया गया।
अनियमितताओं की लंबी फेहरिस्त
निरीक्षण में सामने आया कि:
- किसानों को तय कीमत से अधिक दर पर खाद बेची गई।
- स्कंध पंजी (स्टॉक रजिस्टर) और इनवॉइस का मिलान सही नहीं पाया गया।
- कई बिक्री रसीदों में विक्रेता का लाइसेंस नंबर और खाद का बैच नंबर तक दर्ज नहीं था।
- अधिकांश किसानों को बिक्री की कोई पावती ही जारी नहीं की गई।
- पीओएस मशीन में दर्ज बिक्री और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर पाया गया।
कार्रवाई की तैयारी
गंभीर गड़बड़ियों के बाद उर्वरक निरीक्षक पलारी ने विक्रेता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। 3 दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो विक्रेताओं के खिलाफ उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
संयुक्त संचालक कृषि श्रीमती गोपिका गभेल ने बताया कि सरकार किसानों के हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी और खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ एक दुकान का नहीं है, बल्कि किसानों की मेहनत और खाद वितरण प्रणाली की साख से जुड़ा है। अब देखना होगा कि नोटिस के बाद विक्रेता क्या जवाब देते हैं और प्रशासन किस हद तक सख्त कदम उठाता है।
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