जब जांजगीर पहुँची महिला आयोग की अध्यक्ष: संपत्ति बंटवारे से लेकर माफी और सुलह तक कई प्रकरणों का हुआ निपटारा
जांजगीर-चांपा, 12 सितम्बर 2025।
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने शुक्रवार को कलेक्ट्रोरेट सभाकक्ष में जनसुनवाई करते हुए महिलाओं से जुड़े कई संवेदनशील प्रकरणों पर सुनवाई की। यह सुनवाई आयोग की 343वीं प्रदेश स्तरीय और जांजगीर जिले की 12वीं जनसुनवाई थी। आयोग की सदस्य श्रीमती सरला कोसरिया भी इस अवसर पर मौजूद रहीं।
🔹 संपत्ति बंटवारे का मामला
सुनवाई के दौरान एक अहम प्रकरण अकलतरा तहसील से आया, जिसमें पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे को लेकर विवाद था। दोनों पक्षों की आपसी रजामंदी से सीमांकन और चिन्हांकन कराने की सहमति बनी। आयोग ने समझाइश देकर मामले को नस्तीबद्ध (फाइनल क्लोज) कर दिया।
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🔹 प्राचार्य ने मांगी माफी, हुआ समझौता
एक अन्य मामले में आवेदिका और प्रभारी प्राचार्य के बीच विवाद सामने आया। सुनवाई के दौरान प्राचार्य ने आवेदिका से आयोग के समक्ष माफी मांगी, जिसे आवेदिका ने स्वीकार किया। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया कि भविष्य में अपमानजनक व्यवहार न दोहराया जाए। साथ ही, इस मामले की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर दोनों के स्थानांतरण की सिफारिश की जाएगी।
🔹 बहनों को संपत्ति से बाहर करने की मांग
एक मामले में आवेदिका ने दावा किया कि पिता की मृत्यु (1993) के बाद भी बहनों के नाम से दर्ज जमीन में उन्हें हिस्सा न दिया जाए। आयोग ने स्पष्ट किया कि कानूनी तौर पर मां और बहनों का नाम दर्ज होना सही है, इसलिए दोनों पक्ष तहसील कार्यालय अकलतरा से विधिक प्रक्रिया पूरी करें। यह मामला भी नस्तीबद्ध किया गया।
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🔹 पति-पत्नी का सुलह, बच्चे और गर्भवती महिला की सुरक्षा पर जोर
एक दंपत्ति का विवाद सुनवाई में आया, जिसमें महिला पांच माह की गर्भवती है और उनका एक आठ वर्षीय पुत्र भी है। आयोग ने दोनों की सहमति पर साथ रहने की व्यवस्था सखी प्रशासिका और प्रोटेक्शन ऑफिसर की निगरानी में करने का आदेश दिया।
निर्देश दिया गया कि अनावेदक 13 सितम्बर को अपनी पत्नी को मायके से लिवाकर लाए और सखी सेंटर में इकरारनामा निष्पादित करे। साथ ही, इस परिवार पर एक साल तक समय-समय पर निगरानी रखी जाएगी।
🔹 आवेदिका के पलटे बयान पर मामला बंद
एक प्रकरण में आवेदिका सुनवाई में अनुपस्थित रही। उसने पहले अनावेदक के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन जांच में उसने ही अपने आरोपों को निराधार बताया। उप पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट और आवेदिका के हस्ताक्षरित बयान के आधार पर यह मामला बंद कर दिया गया।
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📌 नतीजा
जांजगीर-चांपा की इस जनसुनवाई में संपत्ति विवाद, वैवाहिक मतभेद, कार्यस्थल पर अपमानजनक व्यवहार और झूठे आरोप जैसे कई संवेदनशील मामलों का निपटारा हुआ। महिला आयोग की सक्रिय पहल ने न सिर्फ कानूनी समाधान की दिशा दिखाई, बल्कि कई परिवारों को दोबारा जोड़ने का भी काम किया।
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