जुलाई 30, 2026

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दिल्ली अस्पताल निर्माण घोटाला: AAP नेता सौरभ भारद्वाज के ठिकानों पर ED की छापेमारी

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में अस्पताल निर्माण घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक सौरभ भारद्वाज के 12 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई 5,590 करोड़ रुपये के अस्पताल प्रोजेक्ट में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में की गई है। मामले की जांच एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) भी कर रही है।

2018–19 में 24 अस्पताल प्रोजेक्ट को मंजूरी

साल 2018–19 में दिल्ली सरकार ने 24 अस्पताल प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी थी। इनमें 11 नए अस्पतालों का निर्माण और 13 पुराने अस्पतालों का विस्तार शामिल था। इन प्रोजेक्ट्स की लागत करीब 5,590 करोड़ रुपये तय की गई थी। लेकिन आरोप है कि ये प्रोजेक्ट न तो समय पर पूरे हुए और न ही तय लागत में बने। उल्टा प्रोजेक्ट्स की लागत कई गुना बढ़ गई और भारी हेराफेरी की आशंका जताई जा रही है।

विपक्ष की शिकायत से शुरू हुई जांच

22 अगस्त 2024 को तत्कालीन नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने एसीबी को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया था कि निर्माण की लागत बढ़ाकर और नियमों की अनदेखी कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। इसमें सौरभ भारद्वाज और तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन का नाम सीधे तौर पर लिया गया था।

ICU प्रोजेक्ट में सबसे बड़ा घोटाला

सबसे बड़ा घोटाला ICU अस्पताल प्रोजेक्ट में बताया जा रहा है। योजना के तहत 6,800 बेड वाले 7 ICU अस्पताल 1,125 करोड़ रुपये की लागत से 6 महीने में बनने थे। लेकिन 3 साल बाद भी केवल 50% काम ही पूरा हो पाया। अब तक 800 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और लागत 100% से ज्यादा बढ़ चुकी है। इस प्रोजेक्ट का ठेका SAM India Buildwell Pvt Ltd को दिया गया था। इसी तरह LNJP अस्पताल का नया ब्लॉक 488 करोड़ से बढ़कर 1,135 करोड़ रुपये का हो गया, लेकिन अभी भी अधूरा है।

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ज्वालापुरी और मादीपुर अस्पतालों में बिना मंजूरी के अवैध निर्माण हुआ। इन प्रोजेक्ट्स में Parnika Commercial और Ramacivil India जैसी कंपनियां शामिल थीं। पॉलीक्लिनिक प्रोजेक्ट में भी गड़बड़ियां सामने आईं। यहां 94 क्लीनिक बनने थे लेकिन केवल 52 ही तैयार हो पाए, जबकि लागत 168 करोड़ से बढ़कर 220 करोड़ तक पहुंच गई।

HIMS सिस्टम लागू नहीं

दिल्ली के अस्पतालों में पारदर्शिता लाने के लिए HIMS (Hospital Information Management System) लागू किया जाना था। लेकिन आरोप है कि NIC का मुफ्त सॉल्यूशन जानबूझकर खारिज कर दिया गया और सिस्टम लागू ही नहीं किया गया।

एसीबी की गहन जांच जारी

दिल्ली सरकार की अनुमति (Section 17A, Prevention of Corruption Act) के बाद FIR दर्ज की गई। IPC की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी), 120-B (साजिश) और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(1) के तहत केस दर्ज किया गया है। अब ACB इस पूरे घोटाले में नेताओं, अफसरों और ठेकेदारों की भूमिका की गहराई से जांच करेगी।

AAP का पलटवार

ED की कार्रवाई पर AAP नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। आम आदमी पार्टी की ओर से पहला बयान देते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि “यह कार्रवाई मोदी जी की डिग्री से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए की गई है।” सिसोदिया ने साफ किया कि जिस समय का यह केस बताया जा रहा है, उस वक्त सौरभ भारद्वाज मंत्री ही नहीं थे। उन्होंने इस पूरे मामले को झूठा करार देते हुए कहा कि सत्येंद्र जैन के केस की तरह यह भी फर्जी केस है।

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