13 सितम्बर को होगा नेशनल लोक अदालत: आपसी सुलह से निपटेंगे हजारों मामले
सारंगढ़-बिलाईगढ़। न्यायालयीन बोझ कम करने और लोगों को त्वरित न्याय दिलाने की पहल के तहत आगामी शनिवार, 13 सितम्बर 2025 को पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली के निर्देश पर किया जा रहा है।
राज्य के अधीनस्थ न्यायालय से लेकर उच्च न्यायालय तक सभी न्यायालयों में यह विशेष लोक अदालत होगी। यहां ऐसे मामले रखे जाएंगे, जिनमें दोनों पक्षकार आपसी सहमति से राजीनामा या समझौता कर सकते हैं।
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आपसी सुलह से होगा विवादों का हल
न्यायालयों में लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए लोक अदालत में पक्षकारों को समझौते का अवसर दिया जाएगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बताया कि राजीनामा योग्य प्रकरणों की सूची तैयार कर दोनों पक्षकारों को नोटिस भेजे जा रहे हैं।
संबंधित लोग अपने केस की स्थिति और प्रक्रिया के बारे में अधिक जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं।
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किन विभागों और मामलों का होगा निपटारा?
नेशनल लोक अदालत केवल न्यायालयीन मामलों तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें प्रशासनिक और राजस्व विभागों से जुड़े कई मामलों को भी निपटाया जाएगा।
संबंधित व्यक्ति यहां अपने लंबित कर और बिलों का भुगतान कर सकते हैं। इसमें शामिल हैं –
- कलेक्टर, अपर कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार के न्यायालय
- समस्त बैंक
- पुलिस विभाग
- नगर निगम, नगरपालिका और नगर पंचायत
- बीएसएनएल
- विद्युत विभाग
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इन प्रकरणों पर रहेगा विशेष फोकस
लोक अदालत में निम्नलिखित मामलों का निपटारा राजीनामा और सुलह के आधार पर किया जाएगा –
- दाण्डिक राजीनामा योग्य प्रकरण
- चेक बाउन्स से जुड़े मामले
- बैंक रिकवरी और प्री-लिटिगेशन प्रकरण
- मोटरयान अधिनियम से जुड़े केस
- भरण-पोषण (मेंटेनेंस) से जुड़े मामले
- परिवार न्यायालय के विवाद
- श्रमिक प्रकरण
- जमीन विवाद
- विद्युत और जलकर मामले
- संपत्ति कर प्रकरण
- टेलीफोन बिल विवाद
- राजस्व संबंधित मामले
वैकल्पिक समाधान पर जोर
लोक अदालत का उद्देश्य केवल विवाद समाप्त करना ही नहीं है, बल्कि पक्षकारों के बीच आपसी सहमति और सौहार्द्र स्थापित करना भी है। इसलिए इसमें उपस्थित लोगों को मध्यस्थता और समझौते की संभावनाओं पर चर्चा कर समाधान तक पहुंचने का मौका दिया जाएगा।
इस प्रक्रिया से न केवल पक्षकारों को राहत मिलेगी, बल्कि लंबित मामलों का बोझ भी न्यायालयों से कम होगा।
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